लोकसभा चुनाव: क्या इस बार उत्तराखंड में ये मिथक तोड़ेंगे त्रिवेंद्र ? क्या बनेगा नया रिकॉर्ड

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हुए तीन लोकसभा चुनावों के नतीजे प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ रहे हैं। अब देखना ये है कि बीजेपी इस मिथक को तोड़ पाने में सफल होती है या नहीं।

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लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। उत्तराखंड में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव होने हैं। कहने को उत्तराखंड में महज पांच लोकसभा सीटें हैं, लेकिन ये सीटें बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। साल 2014 में मोदी लहर के वक्त बीजेपी ने उत्तराखंड से कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था। इस वक्त भी बीजेपी पर पिछले प्रदर्शन को दोहराने का दबाव है। वैसे तो लोकसभा का महासंग्राम मुख्य रूप से नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी के बीच है, लेकिन असली परीक्षा सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की है। उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटें जीतने के लिए बीजेपी को कई कसौटियों पर परखा जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लोकसभा चुनाव से जुड़े पुराने मिथक को तोड़ने का भी दबाव है। पिछले लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो उत्तराखंड में जिस पार्टी की सरकार रही है, उसे लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। आगे जानिए आंकड़े..

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राज्य गठन के बाद हुए तीन लोकसभा चुनावों के नतीजे प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ रहे हैं। साल 2004 में जब उत्तराखंड में एनडी सरकार थी, तो कांग्रेस को सिर्फ एक लोकसभा सीट मिली थी। साल 2009 में जब खंडूरी सरकार आई तो बीजेपी एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई। साल 2014 में हरीश रावत सरकार के वक्त उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया। अब देखना ये है कि त्रिवेंद्र सरकार ‘जिसकी सरकार, उसको पड़ी मार’ के मिथक को तोड़ पाने में सफल होती है या नहीं। पिछले लोकसभा चुनाव मे बीजेपी के पक्ष में माहौल था, पांचों सीटें बीजेपी की झोली में गिरी थीं। हालांकि अब हालात अलग हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में 55.93 प्रतिशत वोट हासिल कर रिकॉर्ड बनाने वाली बीजेपी का वोट शेयर पिछले पांच साल में घटा है। बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 55 प्रतिशत मत हासिल किए थे। इसके बाद से बीजेपी का मतदान प्रतिशत गिरा है।

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साल 2017 के विस चुनाव में बीजेपी ने 70 सीटों में से 57 जीतीं, लेकिन पार्टी का मत प्रतिशत 46.5 प्रतिशत रहा। इसके बाद हुए निकाय चुनाव में बीजेपी सात निगमों में से पांच ही जीत पाई। बात करें चुनाव प्रचार की तो बीजेपी के पास चुनाव प्रचार के लिए प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेताओं तक की भारी फौज है। प्रदेश में उनके पास चार पूर्व मुख्यमंत्रियों बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, विजय बहुगुणा और रमेश पोखरियाल निशंक की टीम है। इसके अलावा कांग्रेस में हेवीवेट माने जाने वाले सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य भी अब बीजेपी में हैं। वहीं प्रदेश में कांग्रेस के प्रचार का दारोमदार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कंधों पर है। अब सवाल ये है कि क्या त्रिवेंद्र इस बार नया रिकॉर्ड स्थापित करने में कामयाब साबित होंगे ?


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