रुद्रप्रयाग के गरीब घर का बेटा...6 साल से बिस्तर पर पड़ा है, DM मंगेश से मदद की अपील

जखोली ब्लॉक के रहने वाले 14 साल के मुकेश को आपकी मदद की दरकार है। पिछले 6 साल से बीमार मुकेश बिस्तर पर पड़ा है, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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किसी माता-पिता के लिए इससे बड़ी पीड़ा कोई और नहीं हो सकती कि उन्हें अपने बच्चे को बीमारी की हालत में बिस्तर पर जिंदगी गुजारते देखना पड़े। रुद्रप्रयाग के जखोली में रहने वाले 14 साल के मुकेश के माता-पिता पिछले 6 साल से इसी दर्द, इसी पीड़ा को महसूस कर रहे हैं। मुकेश के पिता शिशुपाल सिंह कैंतुरा मजदूर हैं, फिर भी उनसे जितना बन पड़ा उन्होंने बच्चे के इलाज के लिए कोशिश की। इस कोशिश में उनके सिर पर लाखों रुपये का कर्जा हो गया है। दो जून की रोटी तक बड़ी मुश्किल से जुटा पाने वाला ये परिवार अब 14 साल के मुकेश के इलाज के लिए प्रशासन से मदद मांग रहा है। लाचार पिता ने डीएम मंगेश घिल्डियाल से बेटे के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। जिसके बाद डीएम मंगेश घिल्डियाल ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके झा को किशोर के बारे में जानकारी हासिल कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।

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महरगांव में रहने वाला मुकेश सामान्य बच्चों की तरह हंसी-खुशी अपनी जिंदगी जी रहा था, लेकिन साल 2013 में सबकुछ बदल गया। भूधंसाव की वजह से ढही दीवार की चपेट में आने से मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गया था। पिता ने रुद्रप्रयाग से लेकर जौलीग्रांट तक के अस्पतालों में मुकेश का इलाज कराया, लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हुआ। सिर पर गंभीर चोट के चलते उसका पूरा शरीर कमजोर हो गया, जिस कारण वह बिस्तर पर लेटा हुआ है। मुकेश का परिवार बेहद गरीब है। मजदूर पिता पर लाखों का कर्जा हो गया है। परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है। हालांकि राहत की बात ये है कि डीएम मंगेश घिल्डियाल ने मुकेश की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। राज्य समीक्षा भी आपसे अपील करता है कि इस बच्चे को उसकी जिंदगी वापस लौटाने में मदद करें, जितना संभव हो मुकेश के परिवार की मदद करें।

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बेरहम सिस्टम ने पिछले 6 साल से इस गरीब परिवार की सुध नहीं ली। स्थिति यह है कि पिछले छः सालों से मुकेश बिस्तर में मृत समान पड़ा हुआ है। इस परिवार पर गरीबी जैसे अभिशाप तो था ही, ऊपर से मुकेश की इस हालत ने इस परिवार को जीवन भर के लिए दर्द की भट्टी में झोंक दिया है।गरीबी ही सही पर हँसते खेलते इस परिवार की खुशियों पर ऐसा ग्रहण लगा दिया कि अब न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य चिंता सताने लगी है। मुकेश के पिता रूआवसें स्वर में कहतें जब तक मां-बाप हैं तब तक तो हम इसकी देखभाल कर लेंगे लेकिन हमारे जाने के बाद कौंन इसे देखेगा। किसी गरीब की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है, आप भी इसे अपना फर्ज समझकर निभाईये। मुकेश और उसके परिवार को आपकी मदद की जरूरत है।


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