पहाड़ में सरकारी स्कूल की बाउंड्री ढही, खाई में गिरी दो छात्राएं..बुरी तरह चोटिल!

धारचूला में स्कूल की जर्जर दीवार ढह गई। हादसे में दो बच्चियां बुरी तरह चोटिल हुई हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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महिला दिवस के दिन जब बेटियों की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे थे, बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया जा रहा था, ठीक उसी वक्त पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में एक प्राथमिक स्कूल की चारदीवारी ढह गई। हादसे में स्कूल में पढ़ने वाली दो बच्चियां बुरी तरह चोटिल हुई हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। हादसा तहसील मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर बुंगबुंग के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की जर्जर बाउंड्री वॉल भरभरा कर ढह गई। जिससे बाउंड्री वॉल के मलबे में पास में खेल रही दो बच्चियां भी आ गई। बताया जा रहा है कि इसके बाद छात्राएं 60 फीट गहरी खाई में जा गिरीं। हादसे में 13 साल की बबीता और 3 साल की यक्षिता बुरी तरह चोटिल हो गईं। बच्चियों के चीखने-रोने की आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे और बच्चियों को खाई से निकाल कर अस्पताल पहुंचाया।

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बच्चियों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए पिथौरागढ़ रेफर कर दिया गया है। घायल छात्रा यक्षिता आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ती है, जबकि बबीता 8वीं की छात्रा है। दोनों बच्चियों के सिर, आंख और पैर में चोट लगी है। हादसे के बाद ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले साल जून में हुई बरसात में स्कूल की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से लेकर अब तक चारदीवारी की मरम्मत नहीं हुई। इस बारे में शासन-प्रशासन को कई बार अवगत करा दिया गया है, फिर भी लापरवाही बरती गई। समय पर मरम्मत कराई गई होती तो आज ये हादसा नहीं होता। शासन-प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा ग्रामीणों ने इस बारे में कुछ खास बातें बताई हैं, जो कई सवाल खड़े करती हैं...आगे जानिए

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ग्रामीणों ने बताया कि जूनियर हाईस्कूल सिमखोला का भवन भी क्षतिग्रस्त है, तब से वहां के स्कूल की कक्षाएं भी प्राथमिक विद्यालय बुंगबुंग में ही संचालित होती हैं। यहीं आंगनबाड़ी केंद्र भी है। जूनियर में दस और प्राथमिक पाठशाला में 25 बच्चे पढ़ते हैं। सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तमाम दावे कर रही है, लेकिन जर्जर स्कूलों की भी तो सुध लो। गनीमत रही कि हादसे के वक्त दीवार के पास केवल 2 बच्चियां खेल रहीं थी, अगर दूसरे बच्चे भी वहां होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल इतना जरूर है कि इसके बाद कई सवाल खड़े होने लाज़नी है। आज शिक्षा के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं, स्कूलों को हाईटेक किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, सुरक्षा को लेकर बड़ी बड़ी बातें की जा रही हैं….क्या ये ही है इन सभी दावों का सच ?


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