देवभूमि की माधुरी बड़थ्वाल को मिला नारी शक्ति पुरस्कार, राष्ट्रपति ने दिया सम्मान

उत्तराखंड के लिए गौरवशाली पल है। पहाड़ की माधुरी बड़थ्वाल को नारी शक्ति सम्मान से नवाजा गया है।

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उत्तराखंड की नारी शक्ति की जितनी तारीफ करें, उतना कम है। एक बार फिर से एक महिला ने उत्तराखंड को गौरवशाली पल दिया है। इनका नाम है माधुरी बड़थ्वाल। आकाशवाणी की पहली महिला संगीत निर्देशक डॉ. माधुरी बड़थ्वाल को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें ये पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें सम्मानित किया। आइए आपको डॉक्टर माधुरी बड़थ्वाल के बारे में बता देते हैं। ऐसे लोगों के बारे में जानना जरूरी है, जो हमारी लोक संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखते हैं। डॉ माधुरी बड़थ्वाल भी उनमें से एक बड़ा नाम हैं। डॉक्टर माधुरी बड़थ्वाल उत्तराखंड की लोक संस्कृति का वो चेहरा हैं, जिन्हें देवभूमि का मान और सम्मान बेहद प्यारा है। डॉक्टर माधुरी ऑल इंडिया रेडियो की पहली महिला म्यूज़िक कम्पोज़र हैं।

उत्तराखंड के लोक गीत और वाद्य यंत्रों से माधुरी जी का 45 साल पुराना है। आज भी डॉक्टर माधुरी बड़थ्वाल उत्तराखंड के लोक संगीत के सरंक्षण के लिए कार्यरत है। कहा जाता है कि ढाई साल की उम्र से ही माधुरी जी ने संगीत, सुरों और नृत्य से प्रेम कर दिया था। उन्होंने बड़े पैमाने पर उत्तराखंड के लोक संगीत का प्रचार प्रसार किया है। आपको जानकर हैरानी होगी उन्होंने देवभूमि की संस्कृति के सरंक्षण के लिए पिछले 45 सालों से काम किया है। सैकड़ों विद्यार्थियों को उन्होंने सिखाया भी और निर्देशित भी किया।

उन्होंने उत्तराखंड के दुर्लभ वाद्य यंत्रों को दस्तावेज़ के रूप में संजोया है। डॉ माधुरी ने उत्तराखंड के कई पुराने और अनजान कलाकारों जैसे जमुना देवी, भगीरथी देवी, बसन्ती देवी को भी रिकॉर्ड किया है। आज उत्तराखंड का कोई भी वाद्य यंत्र ऐसा नहीं है, जिसकी जानकारी डॉक्टर माधुरी का ना हो। यहां तक कि उत्तराखंड के नए गीतकार, संगीतकार, कहानीकारों और लेखकों के लिए डॉक्टर माधुरी आदर्श हैं।

डॉक्टर माधुरी ने लैन्सडाउन मे अपनी शिक्षा की शुरुआत की। पिता श्री चंद्रमणि उनियाल पहले से ही गायक और बेहतरीन सितारवादक थे। हाई स्कूल करते ही अपनी मेहनत के बूते डॉक्टर माधुरी ने संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपने ही स्कूल राजकीय इंटर कालेज लैंसडाउन मे संगीत टीचर के पद पर काम किया। संगीत और राग रागिनियों का उन्होंने बारीकियों अध्ययन किया। आकाशवाणी नजीबाबाद मे पहली महिला म्यूज़िक कम्पोजर के रूप मे उन्हें नेशनल लेवल पर पहचान मिली। इस दौरान माधुरी जी ने सैकड़ों संगीत, नाटकों का कुशल निर्देशन किया। गढ़वाली भाषा के कई मुहावरों का गूढ ज्ञान उन्हें विरासत में ही मिला था। माधुरी जी नजीबाबाद से प्रसारित धारावाहिक 'धरोहर' का सृजनात्मक प्रसारण कर चुकी हैं। उत्तराखंड के लोक संगीत की धरोहर संजोने के लिए डॉ माधुरी बड़थ्वाल जी को कोटि कोटि प्रणाम।


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