देहरादून में विक्रम चालकों की मनमानी नहीं चलेगी, अब नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई

देर से ही सही विक्रम चालकों की मनमानी रोकने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। देहरादून के लिए कुछ राहत भरी खबर है।

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देहरादून में रहते हैं तो कभी ना कभी आपने विक्रम का सफर किया ही होगा। विक्रम चालकों की मनमानी के किस्से दून में आम हो चुके हैं। विक्रम चालक 6 सवारियों के परमिट पर 9 सवारियां विक्रम में बैठाते हैं, कोई विरोध करता है तो उसके साथ बदसलूकी की जाती है। कई बार अकेली महिला यात्रियों के साथ विक्रम चालकों के छेड़छाड़ के मामले भी सामने आ चुके हैं। अब देर से ही सही शासन-प्रशासन ने नियम कानूनों तो धता बता कर बेखौफ दौड़ रहे विक्रमों पर लगाम कसने की तैयारी शुरू कर दी है। गढ़वाल मंडल आयुक्त व संभागीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने मोटर व्हीकल एक्ट व परमिट की शर्तानुसार इन्हें संचालित करने के आदेश दिए हैं, जिसके बाद विक्रम चालक परमिट की शर्तों पर अब फुटकर सवारियां नहीं बैठा सकेंगे। इस आदेश को लागू किया गया तो विक्रमों का रंग भी नीला होने के बजाय काला-पीला कराया जाएगा। नए नियम के अनुसार विक्रम चालक फुटकर सवारियां भी नहीं ढो सकेंगे।

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इस वक्त दून में 794 विक्रम, 319 सिटी बस और 3400 ऑटो हैं। ये विभाग में पंजीकृत आंकड़ें हैं, जबकि अनाधिकृत रूप से चलने वाले विक्रमों की संख्या 11 सौ से ऊपर है। ठेका परमिट होने के बाद भी विक्रम स्टेज कैरिज में दौड़ रहे हैं। तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम व प्रेशर हॉर्न बजाते हुए निकलते हैं। पहले भी कईं बार विक्रमों को नियमानुसार चलाने का प्रयास हो चुका है, लेकिन हर बार राजनीतिक दबाव आड़े आ जाता है। बहरहाल विक्रम चालकों की मनमानी पर लगाम लगाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं, उम्मीद है इस कोशिश के अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे। आपको बता दें कि देहरादून में हुई संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण अध्यक्ष डा. पुरुषोत्तम के समक्ष कांट्रेक्ट कैरिज से विक्रमों को स्टेज कैरिज परमिट में परिवर्तित करने का मसला लाया गया।

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सिटी बस महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने एमवी एक्ट और प्रदेश की परिवहन नियमावली के एक्ट का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि चार पहिया वाहन या इससे ऊपर के वाहनों को ही स्टेज कैरिज परमिट दिया जा सकता है। विक्रम महासंघ के अध्यक्ष सतीश शर्मा ने उनकी बात का विरोध किया तो प्राधिकरण के अध्यक्ष ने उनसे कानूनी दस्तावेज मांगे। विक्रम संचालक इस संबंध में कानूनी दस्तावेज नहीं दिखा पाए। प्राधिकरण सचिव एवं आरटीओ दिनेश चंद्र पठोई ने भी कहा कि विक्रमों को एमवी एक्ट के अनुसार स्टेज कैरिज परमिट नहीं दिया जा सकता। जिस पर प्राधिकरण अध्यक्ष ने फैसला किया कि विक्रमों को किसी सूरत में स्टेज कैरिज परमिट में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरटीओ व एआरटीओ को आदेश दिया कि नियमों का सख्त अनुपालन कराते हुए विक्रम संचालित कराए जाएं। आपको बता दें कि विक्रम संचालक वाहन में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाते हैं। सिटी बस, विक्रम व ऑटो में चालकों व परिचालकों के लिए नेम प्लेट के साथ वर्दी पहनना अनिवार्य है। मगर, परिवहन विभाग खामोश है।


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