उत्तराखंड जापानी टेक्नोलॉजी से थमेगा भूस्खलन, 8 जगहों से हो सकती है शुरुआत

खबर आ रही है कि उत्तराखंड के भूस्खलन प्रभावित इलाकों के ट्रीटमेंट के लिए जापानी टेक्नीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

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उत्तराखंड प्राकृतिक आपदा और भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। बारिश, भूकंप और भूस्खलन से उत्तराखंड को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब उत्तराखंड भूस्खलन प्रभावित हिस्सों के ट्रीटमेंट के लिए जापान की मदद लेगा। इस फैसले से पहाड़ के भूस्खलन प्रभावित हिस्सों के जल्द ट्रीटमेंट की उम्मीद जगी है। जापानी तकनीक की मदद से भूस्खलन को रोका जाएगा। ऋषिकेश-देवप्रयाग रोड पर स्थित नीरगाढ़ में के वन क्षेत्रों में भूस्खलन प्रभावित जोन के ट्रीटमेंट में जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। आपको बता दें कि नीरगाढ़ को मॉडल साइट के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, ताकि नीरगाड़ की तर्ज पर दूसरे इलाकों में भी जापानी तकनीक का इस्तेमाल कर भूस्खलन को रोका जा सके। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भूस्खलन ने शासन-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि भूस्खलन रोकने के लिए यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कि किन जगहों में इस ट्रीटमेंट की शुरुआत हो सकती है।

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ऋषिकेश के पास नीरगाड़ के साथ ही मसूरी और कालसी में भी संभावित भूस्खलन वाले इलाकों में जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। रूद्रप्रयाग के पास जवाड़ी और नैनीताल के पास पाडली में भी जापानी तकनीक का इस्तेमाल कर भूस्खलन को रोका जाएगा। कालसी में जोकला, मसूरी में कम्पनी गार्डन, उत्तरकाशी में मल्ला गांव, पिथौरागढ़ में ऊंचाकोट, अल्मोड़ा के ताड़ीखेत में भी जापानी तकनीक के जरिये भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का ट्रीटमेंट होगा। सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को जापानी इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) के साथ हुई बैठक में इस पर चर्चा हुई। मुख्य परियोजना निदेशक जीका अनूप मलिक ने बताया कि इस तकनीक से नीरगाड़, जावड़ी और पाडली में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के ट्रीटमेंट की योजना है। आपदा प्रभावित क्षेत्र के ट्रीटमेंट में जापानी तकनीक कारगर साबित होगी, इससे भूस्खलन रोकने में मदद मिलेगी।


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