पहाड़ के इस सरकारी स्कूल के आगे फेल हैं शहरों के कॉन्वेंट स्कूल, ऐसे शिक्षक को सलाम

ये बात भी सच है कि आज सरकारी स्कूलों के हालात देखकर रोना आता है। इसी दौर में कुछ ऐसे सरकारी स्कूल भी हैं, जहां शिक्षकों ने अपनी मेहनत के दम पर मिसाल खड़ी कर दी है।

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मान जाइए...कि मेहनत ही सब कुछ है। गर हौसले बुलंद हैं, इरादे नेक हैं ...तो तस्वीर भी बदलेगी और तकदीर भी संवरेगी। उत्तराखंड देवभूमि है और वास्तव में इस देवभूमि में कुछ शिक्षक देवतुल्य हैं। ऐसे शिक्षक जो बेजान से सिस्टम में जान फूंकने का काम कर रहे हैं। आज हम आपको दिस कहानी से रू-ब-रू करवा रहे हैं, वो महज़ एक कहानी नहीं बल्कि मिसाल है। ये है राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला (रूद्रप्रयाग)। कभी ये स्कूल जर्जर हालत में था, लेकिन आज ये ही स्कूल कॉन्वेंट स्कूल को भी मात देता नज़र आता है। वास्तव में आपको यहां आकर देखना चाहिए...सब कुछ व्यवस्थित, शानदार फुलवारी, शिक्षा का जबरदस्त माहौल, खेल के लिए अद्भुत सुविधाएं...ये सब कुछ हो पाया सतेन्द्र सिंह भंडारी जैसे शिक्षक की बदौलत…2009 में सतेन्द्र सिंह भंडारी को राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला में नियुक्ति मिली, उस वक्त स्कूल की जर्जर हालत देखकर उनकी भी आंखें भर आई होंगी।

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उस वक्त इस स्कूल में 18 बच्चे पढ़ते थे। बरसात में स्कूल की हालत ऐसी हो गई कि उसे गाँव के पंचायत भवन में शिफ्ट करना पड़ा। 3 साल तक बच्चे वहीं पढ़ते रहे। सतेन्द्र सिंह भंडारी लगातार ये संदेश सभी को पहुंचाते रहे और आखिरकार तीन साल बाद एक लाख पिच्चासी हजार रूपये की सरकारी मदद इस स्कूल के लिए मिल पाई। सड़क से स्कूल दूर था और निर्माण भी होना था...ऐसे में 1 लाख 85 हजार से क्या होता है। खैर...भवन बनने बनने तक ढाई लाख रूपये खर्च हो गये जिसकी राशि सतेन्द्र सिंह भंडारी ने खुद दी। आखिरकार साल 2011 में बच्चे अपने स्कूल में आ गए। छात्र ज्यादा थे और स्कूल में सिर्फ एक कमरा...इसलिए शिक्षक सतेन्द्र सिंह भंडारी ने फिर से कोशिशें शुरू कीं। इस बार एक बड़ी कामयाबी मिली और वर्ल्ड बैंक द्वारा विद्यालय के लिए 66.67 लाख रूपये स्वीकृत हो गये। बूस...फिर क्या था ? अब स्कूल को कॉन्वेंट से भी बेहतर तरीके से तैयार किया गया।

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सबसे पहले स्कूल के लिए दस नाली जमीन ली गई। आकर्षक विद्यालय परिसर, चमचमाता भवन, स्कूल की हर दीवार रंग बिरंगे चित्र, कुर्सी मेज और ग्रीन बोर्ड भी हाई क्वालिटी, प्रोजक्टर से भी बच्चों की पढाई होती है, बच्चो के लिए कम्प्यूटर प्रिन्टर लगे हैं, स्कूल में रचनात्मकता का भंडार है। संगीत की धुन पर प्रेयर, बालगीतो के जरिए पढाई, ऐक्वेरियम, जैविक अजैविक कम्पोस्ट, बच्चो को रिंगाल की टोकरियां और मालू के पत्तल बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। सबसे खास बात है इस स्कूल की नर्सरी। नर्सरी में 16 हजार से ज्यादा पौधे तैयार हैं। पढ़ाई के साथ साथ यहां के बच्चे अलग अलग तरह की प्रतियोगिताओ में भी अव्वल आए हैं। आप भी कभी इस स्कूल में चले आइए...मन मंदिर में शिक्षा का ये मंदिर बस जाएगा और ऐसे शिक्षक को आप बार बार प्रणाम करेंगे।
सौजन्य- दस्तक ठेठ पहाड़ से, टीका डिमरी जी और योगेश चन्द्र जोशी जी (राजकीय शिक्षक, उत्तराखंड)

🌹🌷ये है राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला (रूद्रप्रयाग) जिसे शिक्षक सतेन्द्र भण्डारी ने राज्य का एक ऐसा विद्यालय ...

Posted by Teeka Dimri on Sunday, February 24, 2019


Uttarakhand News: govt school of koy talla rudraprayag

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