शाबाश नवल...पहाड़ के सरकारी स्कूल का छात्र बना अंतरिक्ष वैज्ञानिक

उम्मीदों, हौसलों, सपनों और कल्पनाओं को सच साबित कर देने वाली कहानी पढ़िए। अच्छा लगे तो शेयर जरूर कीजिए।

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‘रख हौसला...वो मंजर भी आएगा’...ये शब्द अपने आप में बहुत बड़ी कहानी कहते हैं और इस कहानी को सच साबित करने का काम किया है कि पहाड़ के सरकारी स्कूल के एक छात्र ने। जिन्हें लगता है कि पहाड़ के सरकार स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बहुत गिरा हुआ है, तो वो इस खबर को जरूर पढ़ें। ये कहानी है कि नवलकिशोर भद्री की...टिहरी गढ़वाल के घनसाली के राजकीय इण्टरमीडिएट कालेज घुमेटीधार से पढाई कर चुका ये छात्र आज सफलता की बुलंदियों पर है। गरीब घर से ताल्लुक रखने वाले नवलकिशोर का physics research laboratory AHMEDABAD में स्पेस साइंस रिसर्च के लिए सलेक्शन हुआ है। आइए...आपको नवल किशोर की सफलता की कहानी भी बता देते हैं। अच्छी लगे तो शेयर भी कीजिएगा

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टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार के खांड गांव के रहने वाले हैं नवलकिशोर, उनके पिता का नाम सोहनलाल भद्री है। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और बेटे में पिता को हुनर दिख रहा था। बचपन से ही पढ़ाई के साथ साथ रचनात्मक कार्यों में रुचि रखने वाले नवलकिशोर की शुरुआती पढ़ाई सरस्वति शिशु मन्दिर पिलखी से हुई। इसके बाद 6 से 12वीं तक की पढ़ाई राजकीय इण्टर कालेज घुमेटीधार से पूरी की।
ये अटूट मेहनत का नतीजा था कि 12वीं मे नवलकिशोर ने उत्तराखण्ड बोर्ड से चौथा स्थान हासिल किया था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, तो नवल ने छात्रवृत्ति की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए खर्चे की व्यस्था भी खुद कर दी।

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भारत सरकार से स्कॉलरशिप मिलने के बाद एमएससी तक की पढाई पूरी की। अब उनका सलेक्शन अंतरिक्ष वैज्ञानिक के तौर फिजिकल रिसर्च लैब्रोटरी नवरंगपुरा अहमदाबाद के लिए हुआ है।
नवलकिशोर कहते कि हर किसी को सरकारी विद्यालयों के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है । मेहनत एवं लगन से पढ़ाई करने वालों का सुनहरा भविष्य बनाने के लिए सरकारी स्कूल काफी हद तक मददगार साबित होते हैं। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से नवलकिशोर भद्री को भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं, इसी तरह से जीवन में आगे बढ़िए और उत्तराखंड का नाम रोशन कीजिए।
हम इस लेख के लिए दैनिक उत्तराखंड टाइम्स का भी धन्यवाद करते हैं।


Uttarakhand News: story of naval kishor bhadri

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