शहीद मोहनलाल रतूड़ी का बेटा बोला..‘मेरे पापा रियल हीरो थे, मैं लूंगा शहादत का बदला’

पिता शहीद हो गए और बेटे ने मन में ठान ली है कि वो भी सेना में भर्ती होगा और दुश्मनों से अपने पिता की शहादत का बदला लेगा।

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पिता परिवार का आधार होते हैं, वो ऐसी छत होते हैं, जिनकी छत्रछाया में बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है, सोचिए उन बच्चों पर क्या गुजर रही होगी, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया हो....शहीद मोहनलाल रतूड़ी के बच्चे भी इस वक्त इसी दुख से गुजर रहे हैं...वक्त बीतने के साथ हो सकता है कि उनका गम थोड़ा कम हो जाए, लेकिन मोहनलाल के चले जाने से उनके जीवन का जो कोना खाली हो गया है उसे कोई भी उम्मीद...कोई भी सांत्वना कभी भर नहीं पाएगी। शहीद मोहनलाल के छोटे बेटे राम रतूड़ी की आंखें पिता को याद कर भर आती हैं। पिता की शहादत ने उनके 14 साल के बेटे राम को उम्र से पहले बड़ा कर दिया है। राम कहते हैं कि मेरे पापा रियल हीरो थे...उनके जैसा कोई नहीं...वो अक्सर पूछते थे कि मैं बड़ा होकर क्या बनूंगा...अब मैं उनके सवाल का जवाब दे सकता हूं...पापा की तरह मैं भी वतन की हिफाजत के लिए सेना में जाऊंगा और पापा की शहादत का बदला लूंगा...इतना कहते ही पिता को याद कर राम रतूड़ी का गला रुंध गया, आंखें भर आईं।

कांवली रोड स्थित नेहरू पुरम एमडीडीए कॉलोनी में रहने वाले शहीद मोहनलाल का बेटा राम पिता को याद कर बिलख उठता है। राम ने बताया कि पिछली बार पिता 22 दिन की छुट्टी लेकर आए थे, 27 दिसंबर को उन्होंने वापस जाते वक्त बच्चों से वादा किया था कि फरवरी में घर आएंगे....पापा आए तो जरूर, लेकिन तिरंगे में लिपटे हुए। 14 फरवरी को बेटे राम की पिता से सुबह साढ़े ग्यारह बजे फोन पर बात हुई थी, लेकिन शाम होते ही उनकी शहादत की खबर आ गई। राम बताते हैं कि पिता मोहनलाल ने जम्मू-कश्मीर के बिगड़ते हालात के बारे में उन्हें बताया था। वो बताते थे कि आतंकियों के खिलाफ रात को कभी भी ऑपरेशन शुरू होता है, और कई-कई दिन तक चलता है। ठंड में भूख लगती है, लेकिन खाना खाने की हिम्मत नहीं होती। पिता की शहादत ने 14 साल के राम को और जिम्मेदार बना दिया है...अब वो भी सेना में भर्ती होना चाहते हैं। बता दें कि देहरादून के मोहनलाल रतूड़ी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। शहीद मोहनलाल रतूड़ी सीआरपीएफ की 110वीं वाहिनी में एएसआई थे।


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