शहीद हुए कमांडो संदीप, बर्थ डे के दिन लगी 4 गोलियां..दो आतंकियों को मारकर चले गए

शहीद संदीप की कहानी जानकर आपको गर्व होगा कि वास्तव में वो वीरता की एक बेमिसाल कहानी लिखकर चले गए।

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थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाकर...ये बोल आज भी काम में गूंजते हैं। ये शब्द उस जवान के लिए जिसके हाथ में एक गोली लगी, दो गोलियां पैर में लगी और एक गोली गर्दन में लगी थी। फिर भी आतंकियों का खात्मा कर दिया। 7 दिन तक वो जवान वेंटिलेटर पर रहा और अब चला गया। जरा सोचिए..किस मिट्टी का बना होगा ये सपूत। बताया गया है कि जिस दिन संदीप को गोली लगी थी, उसी दिन उसका जन्मदिन भी था। 15 फरवरी को उन्हें अपने घर छुट्टी पर आना था। मगर, उससे पहले ही ये हमला हो गया। संदीप कुमार साल 2005 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनका चयन 10 पैरा स्पेशल कमांडो फोर्स में किया गया। संदीप अपनी बटालियन के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाते थे। पुलवामा में जब सीआरपीएफ जवानों पर कायराना आतंकी हमला हुआ था, उससे ठीक दो दिन पहले सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

आतंकियों के साथ मुठभेड़ में संदीप पर चार गोलियां लगी थीं। मुठभेड़ में संदीप ने दो आतंकियों को मार गिराया था। जवान संदीप फरीदाबाद के अटाली के रहने वाले थे। जब उनके शहीद होने की सूचना गांव में पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया। संदीप के भाई सोनू का कहना है कि 12 फरवरी को पुलवामा के गांव रतनीपुरा में आतंकियों के छुपे होने की खबर मिली थी। इसके बाद राजपूताना राइफल्स और संदीप की यूनिट ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन शुरू किया। मुठभेड़ में दो आतंकियों को संदीप ने ढेर कर दिया था। इस दौरान आतंकियों ने सेना पर ग्रेनेड से हमला किया था. जिसके छर्रे संदीप को लगे थे। परिवार में संदीप के माता-पिता, भाई, पत्नी और 6 साल की बेटी के अलावा दो साल के जुड़वा बेटे भी हैं। अमर जवान को हमारा शत शत नमन


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