शहीद चित्रेश बिष्ट के पिता बोले ‘अब गांव जाऊंगा, बेटे का मंदिर बनवाऊंगा..वहीं रहूंगा’

बेटे की शहादत ने पिता एसएस बिष्ट को तोड़ कर रख दिया है, वो बार-बार देहरादून छोड़ने की बात दोहरा रहे हैं।

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जरा सोचिए उस पिता पर क्या गुजर रही होगी, जिसे अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ा। जिस बेटे की नन्हीं अंगुली थामकर उसे चलना सिखाया था, वही बेटा उन्हें अकेला छोड़ कर चला गया। जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए मेजर चित्रेश बिष्ट के पिता का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बेटे की मौत के गम ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया है। वो कहते हैं कि अब मेरे लिए देहरादून में कुछ नहीं बचा। अब यहां नहीं रहूंगा....क्या करूंगा इस मकान का जब बेटा ही नहीं रहा...गांव चला जाऊंगा और सोनू (चित्रेश) का मंदिर बनाकर वहीं रहूंगा। बेटे की मौत के बाद यहां रखा ही क्या है। शहीद के परिवार को सांत्वना देने आ रहे लोगों से पिता एसएस बिष्ट यही कह रहे थे। रोते हुए वो कहते हैं कि मैंने किसी का क्या बुरा किया था, जो ये दिन देखना पड़ा।

पिता एसएस बिष्ट ने कहा बेटा पैरों पर खड़ा था, बस उसकी शादी करानी थी, लेकिन ये शुभ दिन आने से पहले ही वो हमें छोड़कर चला गया। ऐसे कोई छोड़कर जाता है क्या। घर पर मिलने आ रहे रिश्तेदारों के सामने वो सोनू के बचपन से लेकर बड़े होने तक की सारी बातें दोहराने लगते हैं। बेटे की शहादत से रिटायर पुलिस अफसर एसएस बिष्ट बुरी तरह टूट गए हैं, वो बार-बार दून छोड़ने की बात दोहराते हैं। शहीद मेजर चित्रेश की मां भी बेटे को याद कर बिलख रही है। बेटे के शहीद होने की खबर मिलते ही वो बेसुध हो गईं थीं....वो बार-बार बेटे सोनू से मिलने की जिद करती हैं। रविवार तक उन्होंने पानी का एक घूंट तक नहीं पीया था। रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें सांत्वना देने की कोशिश कर रहे हैं। धन्य हैं भारत माता के ऐसे वीर सपूत।


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