उत्तराखंड शहीद मेजर ढौंडियाल: पहले आतंकियों को मार गिराया..फिर खुद भी चले गए

मेजर विभूति ने शहीद होने से पहले पुलवामा हमले के मास्टर माइंड अब्दुल राशिद गाजी को मार गिराया।

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद होने वाले मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल ने शहादत से पहले पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का खात्मा किया। सोमवार देर रात तक चले मिलिट्री ऑपरेशन के बाद मेजर विभूति को गंभीर हालत में श्रीनगर के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां रात दो बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने आखिरी वक्त में उन्होंने पत्नी निकिता के बारे में सोचा होगा, जिसका हाथ थामे उन्हें केवल दस महीने ही हुए थे....बूढ़ी मां के बारे में सोचा होगा, जो कि दिल की मरीज है और हमेशा अपने लाडले को अपना ध्यान रखने की सीख दिया करती थी...अफसोस कि मेजर विभूति अपने परिवार के पास वापस नहीं लौट सके। मेजर विभूति की शहादत के साथ ही उनकी वीरता और अदम्य साहस की कहानियां भी दून पहुंची।

सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान मेजर विभूति अपनी टीम के साथ उस घर की तलाशी लेने जा रहे थे, जहां पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड अब्दुल राशिद गाजी और एक अन्य आतंकवादी छुपा हुआ था। 55 राष्ट्रीय राइफल को जैसे ही इसकी सूचना मिली, मेजर विभूति अपनी टीम के साथ आतंकियों को ढेर करने के लिए निकल पड़े। सीआरपीएफ और एसओजी की टीम भी मौके पर पहुंच गई। आतंकियों के खिलाफ रात 12 बजकर 55 मिनट पर ऑपरेशन शुरू हुआ, इसी दौरान आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। मेजर विभूति शंकर के गले और सीने में गोली लग गई। मेजर विभूति और उनकी टीम ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए मशीन गनों से फायर किया, जिसमें दो आतंकियों की मौत हो गई। इन आतंकियों में पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड अब्दुल राशिद गाजी भी शामिल है।

गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल मेजर विभूति को श्रीनगर के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां रात दो बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। मेजर विभूति की पार्थिव देह कश्मीर से लाने वाले जवान जगदीश सिंह और लक्ष्मण सिंह ने बताया कि जिस वक्त मेजर विभूति को आतंकियों के एक घर में छिपे होने की खबर मिली थी, उस वक्त वो रात का खाना खाने बैठे ही थे। कॉल आने के बाद उन्होंने खाना थाली में ही छोड़ दिया और ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए निकल पड़े। मेजर विभूति की शहादत से परिजन सदमे में हैं। उनकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। तिरंगे में लिपटे विभूति के पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। पत्नी, मां, बहन, नाते-रिश्तेदार, दोस्त सब फूट-फूटकर रोने लगे। पड़ोसी-रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं।


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