उत्तराखंड में अवैध शराब बेची तो खैर नहीं, मिलेगी 7 साल की सजा

प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री करने वालों को जमानत नहीं मिलेगी, साथ ही 7 साल जेल में काटने होंगे। कैबिनेट मीटिंग में इस फैसले पर मुहर लगी।

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उत्तराखंड में अवैध शराब की बिक्री करने वालों की अब खैर नहीं है। प्रदेश में अवैध शराब बेची तो सात साल की सजा मिलेगी, यही नहीं जमानत भी नहीं मिलेगी। प्रदेश सरकार ने अवैध शराब से कई लोगों की मौत के बाद ये कड़ा कदम उठाया है। राज्य में अवैध शराब की बिक्री के मामले को गैर जमानती बना दिया गया है, इसके साथ ही अवैध शराब की बिक्री पर मिलने वाली सजा दो साल से बढ़ा कर 7 साल कर दी गई है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने सख्त कदम उठाते हुए संयुक्त प्रांत अधिनियम 1910 में परिवर्तन किया है। विधानसभा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव पर मुहर लग चुकी है। बता दें कि रुड़की के झबरेड़ा में जहरीली शराब पीने से 76 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद विपक्ष, सरकार पर सवाल उठा रहा था। मुख्यमंत्री ने अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया था और उन्होंने अपना वादा निभाया भी।

अवैध शराब की बिक्री को गैर जमानती अपराध घोषित करने के साथ ही, 2 साल की सजा को बढ़ाकर 7 साल की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग 16 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 13 पर स्वीकृति की मुहर लगी। कैबिनेट ने उत्तराखंड नगर निगम संशोधन विधेयक 2019 को पटल पर रखने का फैसला लिया। इसके तहत पांच लाख की आबादी वाले नगर निकायों में नगर आयुक्त को पांच लाख रुपये महापौर को छह लाख रुपये, कार्यकारिणी समिति को 15 लाख रुपये और बोर्ड को 15 लाख रुपये से अधिक राशि व्यय करने का अधिकार मिलेगा। कैबिनेट ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की नंदा गौरा योजना में पात्रों के लिए बड़ी घोषणा की है। आइए इस बारे में जानिए

इस योजना के तहत एक परिवार की दो बालिकाओं को जन्म के समय 11 हजार रुपये और 12वीं पास करने पर 51 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड वेस्ट इनर्जी पॉलिसी 2019 को प्रख्यापित करने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए निकायों को एक रुपये प्रति मीटर की दर से 20 वर्ष या परियोजना अवधि तक भूमि उपलब्ध करानी होगी। बिंदाल-रिस्पना रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत एमडीडीए को श्रेणी छह ए (जलमग्न क्षेत्र) का भू उपयोग परिवर्तन करने का अधिकार दिया है। अब एमडीडीए भू परिवर्तन कर योजना के विकास के लिए भूमि स्थानांतरित कर सकेगा। इसके साथ ही पुरुकुल ग्राम से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक रोपवे बनाया जाएगा। पर्यटन विभाग ने रोपवे निर्माण के लिए स्वीकृति दे दी है। परियोजना का काम पीपीपी मोड पर होगा।


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