शहीद विभूति ढौंडियाल...मां से 10 घंटे तक छिपाए रखी शहादत की खबर, सदमे में बहन

शहीद मेजर विभूति की मां हार्ट पेशेंट है, यही वजह थी कि उन्हें बेटे की शहादत की खबर देने की हिम्मत अफसर तक नहीं जुटा पाए।

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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ चले ऑपरेशन में शहीद मेजर विभूति की शहादत की खबर उनकी मां से 10 घंटे तक छिपाए रखी गई। मेजर विभूति की मां बीमार रहती हैं, वह हॉर्ट पेशेंट हैं...शहीद की मां को केवल ये पता था, कि उनके लाडले के पैर में गोली लगी है और वो अस्पताल में भर्ती है। मां दिनभर बैचेन रही, उन्हें अनहोनी का अंदेशा हो गया था...वो पूरे दिन बेटे की सलामती के लिए प्रार्थनाएं करती रहीं। देर शाम मेजर विभूति की पत्नी निकिता और मामा आरएम पोखरियाल ने उन्हें बेटे की शहादत की खबर दी तो वो बेसुध हो गईं। खबर सुनने के बाद से मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वो यकीन नहीं कर पा रहीं कि जो बेटा उनकी जिंदगी का एकमात्र सहारा था वो अब कभी लौटकर नहीं आएगा। शहीद मेजर विभूति की बहनें भी गम में डूबी हैं। मेजर विभूति तीन बहनों के एकलौते भाई थे।

जब मेजर विभूति का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो उनकी बहन ताबूत के पास आकर खड़ी हो गई। वो ये मानने को तैयार ही नहीं थी कि ताबूत में रखा शव उनके भाई का है। बहन ने ताबूत को छुआ, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वो इतने गहरे सदमे में है कि रो भी नहीं पा रहीं। रिश्तेदारों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो ये सच स्वीकार नहीं पा रहीं कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। घर में कोहराम मचा है। शहीद के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार उन्हें किसी तरह संभालने की कोशिश कर रहे हैं।मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के बैजरो गांव के रहने वाले मेजर वीसी ढौंडियाल अब हमारे बीच नहीं रहे। इस वक्त मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल का परिवार देहरादून के नेश्विला रोड के 36 डंगवाल मार्ग में रहता है। 31 साल के मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल सेना के 55 आरआर में तैनात थे। वो तीन बहनों के इकलौते भाई थे। बताया जा रहा है कि बीते साल अप्रैल में ही मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल की शादी हुई थी। शादी के सिर्फ एक साल के भीतर ही मेजर विभूति ढौंडियाल देश के लिए कुर्बान हो गए।

मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल के पिताजी अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसलिए घर की सारी जिम्मेदारियां बेटे के ही कंधों पर रही होगी। उनके पिता स्वर्गीय केएन ढौडियाल सीडीओ आफिस में थे। घर में बूढ़ी दादी और मां हैं। ना जाने कैसे दुखों का पहाड़ इस परिवार पर टूट पड़ा है। आपको बता दें कि दो दिन पहले ही देहरादून के मेजर चित्रेश बिष्ट राजौरी के नौशेरा सेक्टर में विस्फोट में शहीद हो गए थे। मेजर चित्रेश मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के पिपली गांव के रहने वाले थे और उनका परिवार देहरादून के नेहरू कॉलोनी में रहता है। मेजर चित्रेश की सात मार्च को शादी होनी थी, इसके लिए कार्ड भी छप चुके थे। धन्य हैं देवभूमि के ऐसे जांबाज अफसर, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए। धन्य हैं भारत माता के वीर सपूत।


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