उत्तराखंड शहीद के पिता बोले ‘मेरा पोता सेना में भर्ती होगा, पाकिस्तान से बदला लेगा’

शहीद वीरेंद्र के पिता को बेटे की शहादत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उनका पोता बड़ा होकर सेना में भर्ती होगा और पाकिस्तान को सबक सिखाएगा।

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किसी पिता के लिए इससे बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता कि उसे अपने जीते जी बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़े....लेकिन शहीद वीरेंद्र सिंह के पिता बेटे की मौत से टूटे नहीं हैं। 80 साल के दीवान सिंह राणा का कहना है कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के काम आया....मेरा पोता बयान सिंह भी देश की सेवा करेगा। वो बड़ा होकर सेना में भर्ती होगा और पाकिस्तान से बदला लेगा। उन्होंने कहा कि अब बहुत हो गया है, आतंकी देश पाकिस्तान को नेस्तोनाबूत करने का वक्त आ गया है। शनिवार को प्रतापपुर के श्मशान घाट में शहीद की अंत्येष्टी के दौरान शहीद वीरेंद्र के पिता दीवान सिंह ने कहा कि वीरेंद्र हमेशा से देश की सेवा करना चाहता था...देश के लिए वो अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटा। हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं। सेना में भर्ती होने के लिए वीरेंद्र ने बहुत मेहनत की थी, लेकिन कायरों ने पीछे से वार कर उसकी जान ले ली। बेटे को याद कर दीवान सिंह फफक-फफक कर रो पड़े।

उन्होंने कहा कि बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है, लेकिन उसके यूं चले जाने का गम उन्हें जिंदगी भर रहेगा। शहीद के परिजनों ने कहा कि यही वक्त है पाकिस्तान को सबक सिखाने का। आतंकियों से बदला लिया जाना चाहिए, शहीदों की आत्मा को तभी शांति मिलेगी। आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, साथ ही पत्थरबाजों को भी नहीं बख्शा जाना चाहिए। ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, वीरेंद्र तेरा नाम रहेगा...’, ‘भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के बीच शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की सैन्य सम्मान के साथ प्रतापपुर नंबर चार स्थित श्मशान घाट पर अंत्येष्टि की गई। शहीद की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन को जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद को उनके ढाई साल के बेटे बयान ने अपने चचेरे भाइयों के साथ मुखाग्नि दी। दिल्ली से शनिवार सुबह करीब आठ बजे सीआरपीएफ के जवान शहीद वीरेंद्र सिंह की पार्थिव देह को लेकर उनके गांव मोहम्मपुर भुड़िया पहुंचे। पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद की पत्नी और बच्चे ताबूत से लिपट कर रोने लगे। उन्हें रोता देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए।


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