बड़गाम में मारा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी, वो कभी देहरादून में पढ़ता था

बडगाम में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए दो आतंकियों में से एक शोएब कभी देहरादून के इंस्टीट्यूट में पढ़ता था।

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जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षा बलों और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकी में से एक किसी वक्त देहरादून में पढ़ाई करता था। पढ़ाई की राह छोड़ उसने आतंक की राह को चुन लिया, साल 2018 में वो परीक्षा देने के बाद घर गया तो कभी वापस लौट कर नहीं आया। स्थानीय कॉलेज में पढ़ने वाले इस लड़के के बारे में पुलिस ने अपनी इंटेलिजेंस जांच की रिपोर्ट मिलिट्री को सौंप दी थी। बताया जा रहा है कि बडगाम में मारे गए आतंकियों में से एक आतंकी संगठन के लिए युवाओं की भर्ती करता था। दोनों आतंकियों से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद हुए हैं। बडगाम के गोपालपोरा इलाके में सेना और सुरक्षा बलों को आतंकियों के छुपे होने की सूचना मिली थी। जिसके बाद सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। सुरक्षाबलों का घेरा सख्त होते देख आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए। जिनकी पहचान हिलाल अहमद वानी और शोएब मोहम्मद लोन उर्फ मुरसी के रूप में हुई है।

हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी बना 22 साल का शोएब अहमद लोन देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र स्थित एक इंस्टीट्यूट में बीएससी आईटी तृतीय वर्ष का छात्र था। वो जनवरी 2018 में परीक्षा देने के बाद घर गया तो लौटकर नहीं आया। इंस्टीट्यूट ने शोएब के घर वालों को उसके गैरहाजिर होने के संबंध में पत्र भेजा। तब कहीं जाकर उसके घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान शोएब की आतंकियों की वेशभूषा में फोटो और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जिसके बाद सेना और पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। वो साल 2015 में देहरादून आया था। शोएब को आतंकी संगठन ने मुरसी भाई नाम दिया था। शोएब की मां ने ही जम्मू-पुलिस को सूचना दी थी कि शोएब आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। बता दें कि इससे पहले भी देहरादून में पढ़ रहे एक कश्मीरी युवा दानिश की फोटो एक आतंकी के जनाजे के साथ दिखी थी। साल 2017 में दानिश ने आत्मसमर्पण कर दिया था, उसी वक्त पता चला की वो देहरादून में पढ़ाई कर रहा था। दानिश ने भी बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।


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