जय देवभूमि: पलायन से लड़े इन गावों के लोग, 1 साल में गुलाब की खेती से कमाए 1.40 करोड़

जोशीमठ में किसान गुलाब की खेती कर अपनी जिंदगी संवार रहे हैं। यहां बने गुलाब जल और गुलाब तेल की डिमांड देश के साथ-साथ विदेशों में भी है।

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पहाड़ का जीवन पहाड़ जैसी चुनौतियों से भरा है, लेकिन इन चुनौतियों से कैसे पार पाना है, ये उत्तराखंड के लोग बखूबी जानते हैं। तमाम दिक्कतों को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान अब गुलाब की खेती कर अपनी जिंदगी महका रहे हैं। इस प्रयास में उन्हें सफलता भी मिली है। किसान गुलाब जल और गुलाब के तेल की बिक्री कर सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। जोशीमठ के कई गांवों में लोग गुलाब की खेती से जुड़े हैं। यहां के गुलाब से बने प्रोडक्ट केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। आस्ट्रेलिया में यहां बने गुलाब के तेल की खूब डिमांड है। यहां के किसानों की देखादेखी अब दूसरे क्षेत्रों के किसान भी गुलाब की खेती करने के लिए आगे आ रहे हैं। पिछले एक वर्ष में किसानों ने करीब 50 किलोग्राम यानी लगभग एक करोड़ चालीस लाख का तेल तैयार किया था, जो कि हाथों हाथ बिक गया।

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2013 में आई आपदा ने उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों को तबाह कर दिया, लेकिन धीरे-धीरे ही सही यहां जिंदगी रफ्तार पकड़ रही है। गुलाब की खेती ने यहां के वाशिंदों की जिंदगी संवार दी है। पहाड़ी गुलाब का कारोबार उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक फैला है। यही नहीं पहाड़ में उगने वाले गेंदा के फूल बरेली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों में भेजे जा रहे हैं। बड़गांव, मेरग, परसारी और पगनों में सैकड़ों किसान लगभग दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में गुलाब की खेती कर रहे हैं। खेतों के किनारे गुलाब की फसल उगाकर घर पर ही गुलाब जल और तेल तैयार किया जाता है। गुलाब जल प्रति लीटर दो सौ रुपए तक में बिक जाता है। सबसे महंगा बिक रहा है गुलाब का तेल, जिससे बाजार में प्रति लीटर आठ लाख रुपये तक मिल जाते हैं। उत्तराखंड में आने वाले पर्यटक भी किसानों से बड़ी मात्रा में गुलाब जल और गुलाब का तेल खरीद कर ले जाते हैं।


Uttarakhand News: Story of joshimath villegers

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