2 मैच 21 विकेट, 3 बार 5 विकेट, 2 मैन ऑफ मैच...पहाड़ का लाल बना रणजी का सुपरस्टार

ये आंकड़े देखिये... 2 रणजी मैचों में 21 विकेट... 3 बार 5 विकेट हॉल... लगातार 2 बार मैन ऑफ़ द मैच। ये आंकड़े बयां करते हैं कि कम से कम रणजी ट्रॉफी को तो इस साल का सुपरस्टार मिल गया है...

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बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद पहली बार रणजी ट्रॉफी खेल रही उत्तराखंड को एक ऐसा धाकड़ गेंदबाज मिला है जिसने डेब्यू करते ही घरेलू क्रिकेट में ऐसी सनसनी मचाई कि हर कोई उसका कायल हो गया। यकीन नहीं आता तो ये आंकड़े देखिये... 2 रणजी मैचों में 21 विकेट... 3 बार 5 विकेट हॉल... लगातार 2 बार मैन ऑफ़ द मैच। ये आंकड़े बयां करते हैं कि कम से कम रणजी ट्रॉफी को तो इस साल का सुपरस्टार मिल गया है... ये सुपरस्टार है दीपक धपोला। पहली बार मान्यता मिलने के बाद उत्तराखंड ने देहरादून में अपने पहले दो रणजी मैच खेले और दोनों में जीत हासिल की। पहले मैच में उत्तराखंड ने बिहार को 10 विकेट शिकस्त दी तो इसमें भी दीपक धपोला का सबसे अहम योगदान था। धोपाला ने उस मैच में 9 विकेट चटकाए थे। इसके बाद दूसरे मैच में भी उन्होंने अपनी शानदार लय जारी रखते हुए मणिपुर के खिलाफ 12 विकेट हासिल किए। दीपक लगातार तीसरी बार पारी में पांच या इससे ज्यादा विकेट चटकाए। अबतक दो रणजी मैचों में 21 विकेट ले चुके इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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उत्तराखंड के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में 8 मैचों में 14 विकेट लेने वाले दीपक ने रणजी ट्रॉफी में भी अबतक उसी शानदार प्रदर्शन को जारी रखा है। अपनी कंसिस्टेंसी के बारे में बात करते हुए दीपक ने एक टीवी चैनल को बताया कि''वनडे क्रिकेट अलग होती है, विजय हजारे ट्रॉफी में वाइट बॉल से बॉलिंग करनी थी ऊपर से हमारे मैच भी गुजरात में थे तो वहां के विकेट को ध्यान में रखते हुए मैंने बॉल को सही लाइन और लेंथ पर डालने पर ध्यान दिया। लेकिन रेड बॉल क्रिकेट थोड़ा अलग हो जाता है। यहां पर हम अपने होम ग्राउंड पर खेल रहे थे तो हमें उसका फायदा भी मिला क्योंकि हमने यहीं कैंप किया था। मुझे पता था कि विकेट कैसा रहेगा। उसके मुताबिक मैंने अपने आप को तैयार किया।"

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में भागीरथी के रहने वाले दीपक ने 6-7 साल की उम्र से टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उस समय बागेश्वर में कोई क्रिकेट एकेडमी भी नहीं थी लेकिन क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वो स्कूल बंक करके क्रिकेट मैदान पर ही नजर आते थे। इसके बाद 11वीं क्लास में दीपक ने क्रिकेट में करियर बनाने की सोची और बेहतर सुविधाओं के लिए देहरादून आ गए लेकिन देहरादून में हालात कुछ ऐसे ही थे ऊपर से उत्तराखंड के पास एसोसिएशन भी नहीं थी। ऐसे में दीपक ने एक दोस्त के कहने पर दिल्ली में प्रैक्टिस करने की सलाह दी। जिसके बाद दीपक दिल्ली आ गए और कोच राजकुमार शर्मा की देखरेख में अपने टैलेंट निखारना शुरू किया। आज उनकी ये पूरी मेहनत एक मुकाम तक पंहुची है और दीपक धपोला एक बढ़िया गेंदबाज़ बनने की राह में हैं।


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