देवभूमि का गौरव है ये देवी..जिसने पहाड़ की बेशकीमती धरोहर को अब तक बचाए रखा!

जरा दिल से सोचिए कि आखिर उत्तराखंड की शान क्या हैं ? वो महिलाएं..जो निस्वार्थ भाव से देवभूमि के बचाने के लिए लड़ती रहीं।

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65 साल की उम्र में लोग अपनी नौकरी से रिटायर्ड हो जाते हैं, लेकिन आज हम आपको उस शख्सियत के बारे में बताने जा रहा है जो इस उम्र के पड़ाव पर भी अपने बुलंद हौसले से सबको हैरान कर देती है। हम बात कर रहे हैं ठेठ पहाड़ी लोक संस्कृति को जीवंत करती हुई रूपा देवी की। पारंपरिक वेशभूषा, चेहरे पर चमक के साथ दिल में बुग्यालों को बचाने की जिद..ऐसी हैं पहाड़ की रूपा देवी की। देवाल ब्लाक के कुलिंग गांव की रहने वाली रूपा देवी बीते 15 सालों से हिमालय के बुग्यालों को बचाने की मुहिम में जुड़ी हुई है। उनके इसी जुनून को देखते हुए लोग उन्हें बुग्यालो की मदर टेरेसा कहकर बुलाया जाता है। जिस तरह मदर टेरेसा ने निस्वार्थ भाव से जरुरतमंद और मरीजों की सेवा की ठीक उसी तरह रूपा देवी भी बुग्यालो की निस्वार्थ सेवा कर रही हैं।

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उम्र के इस पड़ाव पर 3,354 मीटर की ऊचांई पर रूपा देवी नंदा की वार्षिक लोकजात में शामिल होने जाती हैं। यहां वो बुग्याल बचाओ मुहिम में शामिल होती हैं। रूपा देवी हर साल नंदा देवी लोकजात यात्रा में वेदनी बुग्याल में आयोजित रूपकुंड महोत्सव में लोगों से हिमालय और बुग्यालो को बचाने की अपील करती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस महोत्सव के दौरान वह दूसरी महिलाओं के साथ बुग्यालों में सैलानियों और घोडे खच्चरो की आवाजाही से बने गड्डो को मिट्टी से खुद ही भरती है। वेदनी बुग्याल की खूबसूरती हमेशा बरकरार रहे, इसलिए वो लगातार काम करहती हैं। रूपा देवी के मुताबिक बुग्यालो में भूःक्षरण होने से वो धीरे धीरे सिकुड़ते जा रहे हैं। बहुत ज्यादा दोहन हेने की वजह से बुग्यालो में मौजूद झील, कुंड और ताल सूखते जा रहे है।

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रूपा देवी कहती हैं कि बुग्यालों में इंसानों की ज्यादा दखल देखने को मिल रही है और इसी वजह से यहां बर्फवारी कम होती जा रही है। रूपा देवी के मुताबिक हिमालय की खूबसूरती हर किसी को अपनी तरफ खिंचती है जिसकी वजह से यहां बड़े पैमाने पर ट्रैकिंग होती है। वो ट्रैकिंग के खिलाफ नहीं हैं लेकिन वो नियंत्रित ट्रैकिंग होने के पक्ष में है। इसके साथ ही उन्होंने बुग्यालो में टैंट लगाकर रात्रि विश्राम पर हाईकोर्ट की रोक के फैसले का स्वागत किया है। रूपा देवी कहती हैं कि अगर इसी तरह इंसान का दखल प्रकृति में रहा तो वो वक्त दूर नहीं है जब लोग साफ हवा और साफ पानी के लिए तरस जाएंगे। रूपा देवी सरकार से अपील करते हुए कहती है कि सरकार से लेकर आम लोगों को बुग्यालो के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। वरना वर्तमान को अतीत बनते वक्त नहीं लगेगा।


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