उत्तराखंड में फिर शुरू होगी रिवर राफ्टिंग, वाटर स्पोर्ट्स को भी हाईकोर्ट ने दी हरी झंडी

जब उत्तराखंड में हाईकोर्ट ने वॉटर राफ्टिंग और वॉटर स्पोर्ट्स पर बैन लगाया था, तो हजारों परिवारों का रोजगार छिन गया था। अब अच्छी खबर है।

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वाटर स्पोर्ट्स एडवेंचर्स के शौकीन लोगों के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट से आखिरकार खुशखबरी आई ही गई। कुछ महीने पहले लगी रोक को अब कोर्ट ने हटा लिया है। इसके साथ ही अब टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स और ऋषिकेश में गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग एक बार फिर शुरू हो जाएगी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस बार संचालकों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि इन गेम्स और वॉटर राफ्टिंग का संचालन नियमों के मुताबिक होना चाहिए। दरअसल कोर्ट द्वारा वॉटर राफ्टिंग और वॉटर स्पोर्ट्स पर बैन लगाने के बाद अनगिनत परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट मंडरा गया था। कोर्ट के द्वारा अनुमति मिलने से यहां काम कर रहे लोगों ने राहत की सांस ली है। वाटर गेम्स पर रोक की वजह से इन लोगों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।

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राज्य सरकार, भारतीय सेना और टिहरी झील में बोट संचालकों की संस्था गंगा भागीरथी बोट समिति टिहरी ने कोर्ट में अलग-अलग प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। इसके अलावा भी कुछ और बातें हैं, जिनके बारे में आपका जानना बेहद जरूरी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस दौरान अपने पहले आदेश में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी किया। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह आर्मी को तीन दिन के भीतर वाटर स्पोर्ट्स की अनुमति प्रदान करे। बता दे कि आर्मी की ओर से कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि टिहरी झील में सार्क देशों की ट्रेनिंग होनी है। इसके अलावा अन्य प्रशिक्षण भी कोर्ट के आदेश की वजह से रुक गए हैं।

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इस साल जून में हाईकोर्ट ने सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और तरह के एडवेंचर्स के लिए सरकार को उचित कानून बनाने के निर्देश दिए थे। तब तक के लिए उत्तराखंड में इन पर रोक लगा दी गई थी। बता दें कि एक जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार ने 2014 में भगवती काला और वीरेंद्र सिंह गुसाई को राफ्टिंग कैंप लगाने के लिए कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस दिया था। लेकिन उन्होंने कोर्ट द्वारा जी गई सभी निर्देशों का पालन नहीं किया और राफ्टिंग के नाम पर गंगा नदी के किनारे कैंप लगाने शुरू कर दिए। याचिका में कहा गया कि गंगा किनारे कैंप में ठहरने वाले लोगों द्वारा कचडा फेंकने से नदी का पानी गंदा हो रहा है। जिसके बाद कोर्ट ने नियमों की अनदेखी पर नाराजगी जाहिर करते हुए वाटर स्पोर्टस पर उचित कानून बने तक रोक लगा दी थी।


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