देवभूमि का वीर सपूत...घर में शादी की तैयारियां थीं, वो तिरंगे में लिपटा आया

देवभूमि का वीर सपूत...घर में शादी की तैयारियां थीं, वो तिरंगे में लिपटा आया

story of uttarakhand martyer robin singh bisht  - robin singh bisht, uttarakhand martyer, uttarakhand, uttarakhand news, latest news from uttarakhand,रॉबिन बिष्ट,डुमलोट गांव,मानवेंद्र सिंह,लैंसडौन छावनी,संदीप सिंह पूनिया,बॉर्डर,पहाड़ का सपूतउत्तराखंड,

देश का जवान...देश का सच्चा सपूत, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को भी कुर्बान करने से नहीं घबराता। ऐसे जवानों की अगर असमय मौत हो जाए, तो दुख होता है। ऐसे ही देश के एक वीर जवान के साथ हुआ था। इस सैनिक के घर में परिवार वाले उसकी शादी की तैयारियों में जुटे थे। जोर शोर से तैयारियां चल रही थी लेकिन वो तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा। इसी साल मार्च के महीने में पंजाब के फिरोजपुर में 20 गढ़वाल राइफल में तैनात रॉबिन बिष्ट शहीद हो गए थे। पट्टी बालीकंडारस्यूं के डुमलोट गांव के रहने वाले थे रॉबिन बिष्ट। उस वक्त खबर आई थी कि 23 मार्च को रॉबिन लापता हो गए थे। इसके बाद उनका शव 24 मार्च को मिला। इस नौजवान सैनिक की मौत की खबर के बाद उनके घर परिवार में मातम पसर गया था। रॉबिन का परिवार उनकी शादी की तैयारी कर रहा था।

यह भी पढें - उत्तराखंड शहीद का परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर
परिवार वालों का सपना था कि घर में एक बहु आए और घर-आंगन में रौनक भर जाए। लेकिन क्रूर किस्मत के कालचक्र को कुछ और ही मंजूर था। पिता मानवेंद्र सिंह ने नम आंखों से बताया था कि रॉबिन की सगाई सांसौ गांव में तय हुई थी। परिवार वाले पूरी तैयारियों में जुटे थे और एक खबर से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसके बाद रॉबिन का पार्थिव शरीर लैंसडौन छावनी में लाया गया था। नम आखों से इस सपूत को आखिरी विदाई दी गई थी। रॉबिन बिष्ट के पिता मानवेंद्र सिंह को इस बारे में खबर मिली थी कि उनका बेटा 23 मार्च को लापता हुआ। 24 मार्च को रॉबिन के पिता को खबर दी गई कि उनके बेटे की मृत्यु हो चुकी है। आपको याद होगा कि उस दौरान एक फौजी संदीप सिंह पूनिया की भी हार्ट अटैक से मृत्यु हो गयी थी।

यह भी पढें - पहाड़ के वीर सपूत को आखिरी सलाम...नम आंखों से विदाई
हिसार के रहने वाले सैनिक संदीप सिंह पूनिया की मौत की खबर से ही देशवासियों का दिल भर आया था। संदीप का तीन महीने का बेटा है, जिससे वो अभी तक नहीं मिले थे। देश की सेवा के लिए संदीप सिंह पूनिया बॉर्डर पर तैनात रहे और अपने बेटे को भी एक बार नहीं देख पाए। संदीप के बाद पहाड़ का सपूत चला गया, जिसके घर में शादी की तैयारी चल रही थी। ये देश के वीर जवान ही हैं, जिनकी बदौलत हम आज चैन की सांस ले पा रहे हैं। असमय मौत होना दुखद है, भगवान इस परिवार को दुख सहने की हर शक्ति प्रदान करे।हम ये कहानियां बार बार आपके बीच इसलिए लेकर आते हैं क्योंकि आप इनकी शहादत को भूल ना पाएं। दिल के किसी कोने में आप इन वीरों की शहादत को लौ को जलाए रखें। पहाड़ के इस जवान को हमारा शत शत नमन।


Uttarakhand News: story of uttarakhand martyer robin singh bisht

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें