पहाड़ का सपूत..मां के इलाज के लिए घर आ रहा था..तिरंगे में लिपटकर चला गया

पहाड़ का सपूत..मां के इलाज के लिए घर आ रहा था..तिरंगे में लिपटकर चला गया

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वो जा तो रहा था अपने घर..अपनों के पास, लेकिन उसे क्या पता था कि रास्ते में उसकी मुलाकात मौत से हो जाएगी। ये दर्दनाक वाकया हुआ है भारतीय सेना के जवान हरीश चंद्र सिंह बिष्ट के साथ। जो छुट्टी लेकर अपने परिवार के पास जा रहे थे। लेकिन ट्रेन में सफर के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हरीश चंद्र की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई। इसे विडंबना ही कहा जाएगा की हरीश चंद्र अपनी मां का इलाज कराने बागेश्वर आ रहे थे, लेकिन हापुड़ में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। जिसके बाद हापुड़ में पोस्टमार्टम कर जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास लाया गया। संगम पर कौसानी सिग्नल कोर के जवानों ने सलामी दी। जवान की सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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बागेश्वर के बोर गांव के रहने वाले हरीश चंद्र सिंह बिष्ट (48) डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) में लेह में कार्यरत थे। उन्हें हार्ट की बीमारी थी। 27 अगस्त की देर रात रानीखेत-काठगोदाम एक्सप्रेस में दिल्ली-हापुड़ के बीच उनकी तबियत बिगड़ गई। जिसके बाद आधी रात में टिकट चेक करने पहुंचे टीटी ने जवान को बेसुध पाया। तुरंत उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। वही जैसे जैसे लोगों को इसकी जानकारी मिली परिवार को सांत्वना देने लोग पहुंचने लगा। हरीश चंद्र के बोरगांव स्थित पैतृक घर में उनकी मां, पत्नी और दो बेटे सुनील(22) और मनोज (19) रहते है। उनके पिता भी भारतीय सेना में थे। हरीश भारतीय सेना में दूसरी नौकरी कर रहे थे। कुमाऊं रेजीमेंट से साल 2016 में हवलदार के पद से रिटायर्ड होने के बाद वह डीएससी में चले गए।


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