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Image: Truth behind badrinath aarti

गढ़वाल के महान विद्वान को नमन, दुनिया ने अब देखी बदरीनाथ जी की असली आरती

गढ़वाल के महान विद्वान को नमन, दुनिया ने अब देखी बदरीनाथ जी की असली आरती

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले ते सतेरा स्यूपुरी का विजरवाणा गांव अचानक देशभर की नज़रों में आ गया। देशभर के लोग हैरान थे कि पहाड़ में ऐसे विद्वान ने जन्म लिया। जी हां..अब तक पूरी दुनिया को ये पता था कि देवभूमि के आराध्य भगवान बदरीनाथ जी की आरती किसी मौलाना बदरुद्दीन ने लिखी थी। लेकिन जब दुनिया को इस बात का पता चला कि बदरीनाथ जी की आरती देवभूमि के एक महान शख्स ने लिखी, तो एक बार फिर से पहाड़ के लोगों की क्षमता का गुणगान होने लगा। स्वर्गीय ठाकुर धनसिंह बर्तवाल..जिन्होंने 137 साल पहले ही बदरीनाथ जी की आरती ‘पवन मंद सुगंध शीतल’ को लिखा था। अब जाकर दुनिया को इस बात की जानकारी मिली है कि ये आरती बदरुद्दीन ने नहीं बल्कि पहाड़ के ठाकुर धनसिंह बर्तवाल ने लिखी हैं। इस पांडुलिपि की खास बातें भी जानिए, ये विडियो देखिये...

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ठाकुर धनसिंह बर्तवाल के पड़पोते महेंद्र सिंह बर्तवाल ने अपने घर में इस आरंती की पांडुलिपि संभाली हुई थी। 137 सालों से इस पांडुलिपि की सुरक्षा की जिम्मेदारी बर्तवाल परिवार की ही थी। जिस ढोंडी (लकड़ी का एक खास तरह का बॉक्स) में पांडुलिपि रखी हुई थी, उसके ऊपर सजे शस्त्र ये साबित करते हैं कि क्षत्रियों के लिए परंपरा की रक्षा ही उनका स्वाभिमान है। हमारी टीम को जब इस बारे में पता चला, तो हमने प्रमुखता से इस खबर को दिखाया था। इसका असर ये हुआ कि सरकार तक ये बात पहुंची और तुरंत ही इस पांडुलिपि के शोध के आदेश दिए गए। अब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र यानी यूसैक ने बदरीनाथ आरती की पाण्डुलिपि पर सत्यता की मुहर लगा दी है। फिलहाल पवन मंद सुगंध शीतल से आरती की शुरुआत होती है लेकिन असली आरती में ये पांचवा पद है।

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ठाकुर धनसिंह बर्तवाल अपने वक्त के मालगुजार थे। पुराने वक्त में मालगुजार एक बहुत बड़ा पद होता था। जरा सोचिए पहाड़ के इस विद्वान ने 137 साल पहले बदरीनाथ जी की आरती को लिखा और अब जाकर दुनिया को ये बात पता चल रही है। इस आरती खास बात ये भी है कि पुरानी वाली आरती में वर्तमान आरती से 5 पद ज्यादा है। पुरानी वाली आरती के पहले 5 पद वर्तमान आरती में नहीं हैं। राज्य समीक्षा की पहल के बाद सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद आरती पर बहस शुरू हुई, युसेक ने पांडुलिपियों की जांच की और इसकी इतिश्री सत्य की विजय के साथ हुई। युसेक ने अपनी जांच के बाद बद्रीनाथ जी की आरती की पांडुलिपियों को सही पाया है। स्वर्गीय ठाकुर धनसिंह बर्त्वाल को शत शत नमन।

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