Video: वीरों की देवभूमि...5 दिन में 3 सपूत शहीद, देशभक्ति का इससे बड़ा सबूत क्या है?

Video: वीरों की देवभूमि...5 दिन में 3 सपूत शहीद, देशभक्ति का इससे बड़ा सबूत क्या है?

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उत्तराखंड वीरों की धरती है और इस बात का प्रमाण ये 3 वीर सपूत हैं, जिन्होंने बीते 5 दिनों में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी। 13 जुलाई यानी आज के दिन एक खबर ने फिर से मायूस कर दिया लेकिन देवभूमि के वीर जवानों के लिए दिल में और भी सम्मान पैदा कर दिया। टिहरी गढ़वाल के दोगी पट्टी के बमुंड गांव के प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। प्रदीप अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात इस जवान की शादी डेढ़ साल पहले ही हुई थी। अगले साल जनवरी में उनकी मैरिज एनिवर्सरी थी और वो इसके लिए घर आने वाले थे। कितनी कुर्बानियां और कितनी शहादत ? लिख दीजिए उत्तराखँड के वीरों की शहादत पर कोई किताब..हर किताब कम पड़ेगी। जवानों के शहीद होने का सिलसिला लगातार बरकरार है। बीते कुछ ही दिनों में देवभूमि के 13 से ज्यादा जवान देश के लिए कुर्बान हो गए है। इनमें 3 अमर शहीदों ने पिछले 5 दिनों में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

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शहीद प्रदीप सिंह रावत
रक्षाबंधन नजदीक आने वाला है और दुख की बात तो ये है कि प्रदीप सिंह रावत तीन बहनों के अकेले भाई थे। हर साल अपनी बहनों की रक्षा की वादा करने वाले प्रदीप देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए और हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गए। इस बार ये तीन बहनें किसकी कलाई में राखी बांधेंगी ? तीनों बहनों को जब इस बात का पता चला तो उनका रो-रोकर बुरा हाल है। 26 अगस्त को रक्षाबंधन है और इससे ठीक 13 दिन पहले तीन बहनों को ये दुख भरी खबर मिली। खबर है कि प्रदीप सिंह रावत चौथी गढ़वाल राइफल में तैनात थे और इस वक्त जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में ड्यूटी पर थे। बताया जा रहा है कि प्रदीप सिंह रावत पेट्रोलिंग पर थे। इस दौरन एक बारूदी सुरंग फट गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान ही इस वीर सपूत ने अपनी जान गंवा दी।

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शहीद मनदीप रावत
कोटद्वार के शिवपुर के रहने वाले मनदीप सिंह अभी 6 साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। 28 साल का ये वीर योद्धा गढ़वाल राइफल्स की 15 वीं बटालियन में तैनात था जो इन दिनों 36 आरआर का हिस्सा थे। 28 साल के इस सैनिक का परिवार भी सेना से ही ताल्लुक रखता है। अपने पिता से ही मनदीप ने देशभक्ति सीखी थी। उनके पिता का नाम बूथी सिंह है। मनदीप बड़े थे और उनका छोटा भाई संदीप रावत है। दूसरा भाई संदीप भी सेना में ही इन दिनो श्रीनगर में तैनात है। मनदीप रावत ने शहादत से पहले रात साढे 10 बजे मां- पिता से फोन पर बात की थी। आखिरी बार उन्होंने कहा था कि ‘मां मैं ठीक हूं और आप अपना ध्यान रखना’। गुरेज सेक्टर में मनदीप सिंह रावत शहीद हो गए थे। 36 राष्ट्रीय राइफल को खबर मिली थी कि सीमा पार से कुछ आतंकी घुसपैठ की कोशिश में जुटे हैं। बस फिर क्या था एक मेजर के साथ कुछ जवान आतंकियों का खात्मा करने के लिए निकल पड़े। जब मौके पर पहुंचे तो मालूम हुआ कि उन आतंकियों की संख्या 8 से 10 के करीब है। फिर भी आखिरी दम तक लड़े और अपनी जान गंवा दी।

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शहीद हमीर पोखरियाल
तीन महीने पहले ही हमीर पोखरियाल मई में छुट्टी से ड्यूटी पर वापस गए थे। उस दौरान हमीर ने अपनी गर्भवती पत्नी पूजा ने डिलीवरी के वक्त छुट्टी पर आने की बात कही थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। कश्मीर के गुरेज सेक्टर में आतंकियों से लड़ते हुए इस वीर सपूत ने जान दे दी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पोखरियाल गांव के हमीर पोखरियाल ने आतंकियों से लड़कर अपनी जान कुर्बान कर दी। शहीद की गर्भवती पत्नी के कोख में पल रही जान अपने पिता को नहीं देख पाई। ऐसे हालातों में देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों पर आखिर कोई गर्व क्यों ना करे? भारतीय सेना में 36 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे हमीर पोखरियाल। वो बांदीपुरा में तैनात थे। सोमवार की शाम आतंकियों ने गुरेज सेक्टर में घुसपैठ कर दी। इस भयंकर गोलाबारी में हमीर पोखरियाल शहीद हो गए।


Uttarakhand News: Three martyrs of uttarakhand in just four days

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