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Image: Deepak nainwal family and life

उत्तराखंड शहीद की बेटी बोली ‘पापा स्टार बन गए’..बेटा बोला ‘मैं भी बनूंगा फौजी’

उत्तराखंड शहीद की बेटी बोली ‘पापा स्टार बन गए’..बेटा बोला ‘मैं भी बनूंगा फौजी’

देवभूमि का ये लाल लाखों दिलों में देशभक्ति की लौ जलाकर चला गया । वो 17 घंटे तक आतंकियों से लड़ता रहा। दो गोलियां सीने पर खाई और इसके बाद भी मैदान-ए-जंग में टिका रहा। उसे अस्पताल ले जाया गया तो वहां भी वो मौत से 40 दिन तक जंग लड़ता रहा। इलाज चल रहा था को उसकी अपनी मां से फोन पर बात हुई। उसने मां से कहा कि ‘मां चिंता मत करो, मैं जल्द ठीक हो जाउंगा और फिर बॉर्डर पर जाऊंगा।’ लेकिन होनी को कुछ और भी मंजूर था। उसने अस्पताल में हमेशा हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर ली। आज उस शहीद की प्यारी सी बेटी कहती है कि ‘मेरे पापा स्टार बन गए हैं’। शहीद के छोटे से बेटे ने अपने दादा से कहकर खिलौना बंदूक मगांई है। साढ़े तीन साल का वो मासूम कहता है कि ‘मैं बॉर्डर पर जाऊंगा और आतंकियों को मार गिराऊंगा’।

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ये कहानी है उत्तराखंड शहीद दीपक नैनवाल की। शहीद की पांच साल की बेटी लावण्या अपने पिता पर कविता लिख रही है। लावण्या को वो नारे अब तक याद हैं ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, दीपक तेरा नाम रहेगा।’ शहीद दीपक नैनवाल का साढ़े तीन साल का बेटा कहता है कि ‘जिसने पपा को मारा, मैं उसे छोड़ूंगा नहीं।’ रेयांश की दादी जब उसे देखती है, तो कहती है कि दीपक भी तो ऐसा ही था। दीपक नैनवाल दस अप्रैल की रात जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान घायल हो गए थे। शरीर में दो गोलियां धंस गई थी, फिर भी इस वीर ने हार नहीं मानी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 20 मई को एक लंबी जद्दोजहद के बाद दीपक अपनी जिंदगी से हार गए थे। शहादत को करीब ढाई महीने बीच चुके हैं।

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शहीद दीपक नैनवाल के पिता चक्रधर नैनवाल भी फौज से रिटायर हैं। उनकी तीन पीढिय़ां देश सेवा से जुड़ी रहीं। श्री चक्रधर नैनवाल 10-गढ़वाल राइफल में थे। इस दौरान उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध समेत कई युद्धों में हिस्सा लिया है। दीपक नैनवाल अपने पीछे पत्नी को भी छोड़ गए हैं, जो अक्सर खामोश ही रहती हैं। बताया जाता है कि जिस दिन दीपक नैनवाल को गोली लगी थी, उसके दो दिन बाद ही उन्हें छुट्टी पर घर वापस लौटना था। ये कैसी किस्मत है कि दीपक नैनवाल घर आए लेकिन तिरंगे में लिपटकर आए। 15 अगस्त नज़दीक है और ऐसे वीर सपूतों को याद करना हमारा फर्ज है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया। दीपक नैनवाल भी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर चले गए। शत शत नमन

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