देवभूमि का सपूत चला गया..परिवार में दो प्यारी सी बेटियां, पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल!

देवभूमि का सपूत चला गया..परिवार में दो प्यारी सी बेटियां, पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल!

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मत भूलिए...अगर आप आज चैन से अपने घरों में खुद को महफूज महसूस कर रहे हैं, तो इन वीर सपूतों की वजह से। अगर आप खुली हवा में आज़ादी की सांस ले पा रहे हैं, तो इन सपूतों की वजह से। उत्तराखंड के जांबाज सिपाही शहीद दीवान नाथ सिंह चले गए लेकिन अपने पीछे दो प्यारी सी बेटियों को छोड़कर चले गए। 4 महीने बाद ही दीवान नाथ गोस्वामी रिटायर होकर आने वाले थे। उन्होंने भी अपनी बेटियों के लिए कई सपने बुने थे। क्रूर वक्त और किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि दीवान नाथ हमेशा के लिए आंखें बंद करके चले गए। मेघालय में हुए नक्सली हमले में बीएसएफ के इस जांबाज के पैर पर गोली लगी। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उत्तराखंड का एक और सपूत देश की रक्षा में अपने प्राणों को कुर्बान कर गया। रामनगर के गरमपानी निवासी दीवान नाथ गोस्वामी के घर में मातम पसरा है।

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जबसे शहीद दीवान नाथ गोस्वामी की मां और पत्नी ने उनकी शहादत की खबर सुनी है, तब से दोनों ही बदहवास हालत में हैं। पत्नी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक ये क्या हो गया ? शहीद दीवान नाथ गोस्वामी की दो बेटियां हैं। आराध्या गोस्वामी 5 साल की है, जबकि इशिका गोस्वामी की उम्र 2 साल है। इतनी छोटी सी उम्र में इन बेटियों ने अपने पिता को खो दिया।
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बेटियों के सिर से पिता का साया उठ चुका है। एक मां ने अपना बेटा खो दिय़ा। बुढ़ापे में जिस बेटे ने मां का सहारा बनना था, वो सहारा ही चला गया। पत्नी गुमसुम हैं और अकेली बैठी हैं। लोग हिम्मत बांध रहे हैं और हौसला देने की कोशिश कर रहे हैं। सच तो ये है कि इस परिवार के लिए शहीद दीवान नाथ गोस्वामी की भरपाई कोई नहीं कर सकता। 46 वर्षीय दीवान नाथ बीएसएफ की 141वीं बटालियन में जीडी पद पर तैनात थे। वो चार महीने बाद ही रिटायर होने वाले थे। उन्होंने वीआरएस के लिए भी आवेदन किया था। हाल ही में दो महीने की छुट्टी बिताकर वो 8 जुलाई को ड्यूटी पर लौटे थे। उस वक्त उन्होंने अपनी बेटियों और अपनी परिवार के साथ क अच्छा वक्त बिताया था। भविष्य की कई योजनाओं को लेकर बात हुई थी। सारे सपने तक टूट गए, जब पहाड़ का ये सपूत देश के कुर्बान हो गया। जय हिंद


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