पहाड़ में सुपरहिट हुआ स्वरोजगार का नया फार्मूला... ये खूबसूरत तस्वीरें देखकर दिल को सुकून मिलता है

पहाड़ में सुपरहिट हुआ स्वरोजगार का नया फार्मूला... ये खूबसूरत तस्वीरें देखकर दिल को सुकून मिलता है

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पहाड़ में जहां एक ओर कई गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं वहीं सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से पर्यटन को लेकर एक बहुत अच्छी खबर आई है। इस जिले के सुदूरवर्ती गांव नाबी में ग्रामीणों ने अपने प्रयास से ‘होम स्टे’ कांसेप्ट को धरातल पर उतारा है। कुमाऊं मण्डल विकास निगम (केएमवीएन) के सहयोग से योजना को क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। जिस उत्साह के साथ पर्यटक होम स्टे को हाथो हाथ ले रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि आने वाला दौर फाइव स्टार होटलों का नहीं बल्कि गांवों में होम स्टे का होगा। इससे यहां रोजगार के सपनों को पंख लगने लगे हैं। सुदुरवर्ती ब्यांस घाटी का एक गांव है नाबी। इस गांव के लोगों ने कुछ समय पहले अपने पुश्तैनी घरों को सजा संवारकर होम स्टे की शुरुआत की। इस गांव के होम स्टे की और भी कुछ ख़ास बातें हैं।

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विश्वप्रसिद्ध कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बसे इस छोटे से गांव में अब तक 300 से ज्यादा कैलाश यात्री रात्रि विश्राम कर चुके हैं। देश भर से आने वाले इन यात्रियों को नाबी गांव में केएमवीएन के सहयोग से चलाई जा रही होम स्टे पहल के तहत रात्रि विश्राम कराया गया। केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल के दिशा निर्देशन में शुरू की गई इस पहल को पर्यटकों का अच्छा रेस्पांस मिला है।

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ब्यांस घाटी की संस्कृति, वेशभूषा, खान-पान तथा रहन-सहन को नजदीक से जानने के लिये पर्यटक यहां खिंचे चले आ रहे हैं। फौरी तौर पर इस योजना को सामूहिक सहभागिता के बूते संचालित किया जा रहा है। नाबी में सफलता के बाद इस योजना को उत्तराखंड राज्य के गांवों खासकर सीमावर्ती गांवों के लिए मुफीद माना जा रहा है। इसके दो फायदे होंगे। एक तो पलायन रुकेगा दूसरा देश सीमाओं की सुरक्षा की दृष्टि से सेकेंड डिफेंस लाइन भी मजबूत होगी।

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यहां बताना दिलचस्प होगा कि कुमाऊं में होम स्टे की शुरुआत दो वर्ष पहले देश के सीमावर्ती गांव कुटी में हुई थी। कुटी में आदि कैलाश यात्री दो दिन तक विश्राम करते हैं। कुटी की सफलता के बाद इस वर्ष नाबी गांव में होम स्टे शुरू किया गया। नाबी की देखा देखी दार्मा घाटी में भी होम स्टे शुरू होने जा रहा है। हाल ही में केएमवीएन ने नवयुवक मंगल दल नाबी को 3.83 लाख का चेक प्रदान किया है।

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नवयुवक मंगल दल को आगामी अक्टूबर माह में 30 पर्यटकों को नाबी में होम स्टे करवाना है। जानकारी के मुताबिक इस बार छोटा कैलाश यात्रियों को वापसी में गुंजी के बजाय नाबी गांव में रात्रि विश्राम कर रहे हैं। नाबी में अभी तक होम स्टे से लगभग 30 परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल गया है।

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ब्यांस घाटी की संस्कृति, वेशभूषा, खान-पान तथा रहन-सहन को नजदीक से जानने के लिये पर्यटक यहां खिंचे चले आ रहे हैं। फौरी तौर पर इस योजना को सामूहिक सहभागिता के बूते संचालित किया जा रहा है। नाबी में सफलता के बाद इस योजना को उत्तराखंड के खासकर सीमावर्ती गांवों के लिए मुफीद माना जा रहा है। इसके दो फायदे होंगे। एक तो पलायन रुकेगा दूसरा देश सीमाओं की सुरक्षा की दृष्टि से सेकेंड डिफेंस लाइन भी मजबूत होगी।


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