उत्तराखंड में फिर हुई चीन की घुसपैठ, स्थानीय चरवाहों को इलाका छोड़ने की धमकी दी !

उत्तराखंड में फिर हुई चीन की घुसपैठ, स्थानीय चरवाहों को इलाका छोड़ने की धमकी दी !

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खबर रौंगटे खड़े करती है। ये तो हर कोई पहले से जानता है कि चीन ने डोकलाम के बाद उत्तराखंड पर नज़रें डालनी शुरू कर दी थी। लेकिन अब जो खबर आ रही है, वो सोचने पर मजबूर कर रही है। चमोली जिले के तनजुन ला में चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में 200 मीटर अंदर तक घुसने की खबर है। बताया जा रहा है कि चमोली जिला प्रशासन ने 18 अधिकारियों का एक दल मौके पर भेजा है। आधिकारिक तौर पर अब तक चीनी सैनिकों के घुसपैठ की पुष्टि नहीं हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ITBP के सूत्रों ने ही स्वीकार किया है कि इस महीने 4 बार चीनी सैनिकों द्वारा घुसपैठ की जा चुकी है। खबर है कि हर बार चीनी सैनिक 200 मीटर तक अंदर घुसे। रिपोर्ट में बताया गया है कि आठ जुलाई को 32 चीनी सैनिक उत्तराखंड की सीमा पर गाड़ियों और घोड़ों में नजर आए।

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इसके बाद 10 जुलाई को चीनी सैनिक पांच मोटर साइकिलों में वहां नज़र आए। खबर है कि 10 जुलाई को तुनजुन ला के पास चीनी सैनिक करीब 500 मीटर तक भारत की सीमा में घुसे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आईटीबीपी के विरोध के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए थे। बड़ाहोती में हर साल जांच के लिए अफसरों का दल अगस्त के महीने में भेजा जाता है लेकिन इस बार जुलाई में ही इस टीम को वहां भेजा गया है। चमोली की डीएम स्वाति भदौरिया ने टीम को बड़ाहोती भेजे जाने की पुष्टि की है। तनजुन ला चमोली जिले में बड़ाहोती से तीन किलोमीटर आगे चाइना बॉर्डर की तरफ है। आपको बता दें कि 1956 में चीनी सेना बड़ाहोती तक घुस गई थी। इसके बाद भारत सरकार और चीन की सरकार के बीच बातचीत के बाद दोनों सेनाएं पीछे हटी थी।

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1956 से ये क्षेत्र नो मेंस लैंड कहा जाता है। एक बार फिर से सूत्र बताते हैं कि चीनी सैनिक छोटे वाहनों और घोड़े पर सवार होकर आ रहे हैं। एक रिपोर्ट ये भी कहती है कि चीनी सैनिक बाड़ाहोती एरिया में बहने वाले होतीगाड़ के पास तक भारतीय सीमा में घुसे। बताया जा रहा है कि इस दौरान चीनी सैनिकों ने भारतीय चरवाहों को इशारे से वापस जाने को कहा। चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने सीमा क्षेत्र में घुसपैठ की किसी भी सूचना से इनकार किया है। पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर रही हैं। बीते साल 25 जुलाई को भी बाड़ाहोती क्षेत्र में करीब 200 चीनी सैनिक करीब एक किमी. तक भारतीय सीमा में घुस आए थे। उस दौरान भी काफी हड़कंप मचा था। सवाल ये ही है कि क्या डोकलाम के बाद चीन उत्तराखंड की धरती को जंग का मैदान बनाने की सोच रहा है?


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