उत्तराखंड के वीरों का इतना रक्त बहा...कि लाल हो गई थी कारगिल की धरती...नमन

उत्तराखंड के वीरों का इतना रक्त बहा...कि लाल हो गई थी कारगिल की धरती...नमन

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3 मई 1999 को शुरू होने वाला कारगिल युद्ध आज के ही दिन यानी 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था। वो युद्ध जिसमें भारत के वीर जवानों ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। इस युद्ध में उत्तराखंड के सबसे ज्यादा रणबांकुरों ने दुश्मन को देश की सरहद से बाहर खदेड़ा था और अपने प्राणों को न्यौछावर किया। आपको जानकर गर्व होगा कि उत्तराखंड के 75 रणबांकुरें कारगिल युद्ध में शहीद हुए। राज्य के 30 सैनिकों को उनके अदम्य साहस के लिए वीरता पदकों से अलंकृत किया। राज्य की कुमाऊं और गढ़वाल रेजिमेंट ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को मार भगाने में अहम योगदान दिया है। इस युद्ध में गढवाल राइफल के 54 सैनिक शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध में भाग लेने वाली लगभग हर रेजिमेंट में उत्तराखंड के बहादुर सैनिक शामिल थे। भारतीय सेना ने 524 सैनिकों को खोया तो वहीं 1363 गंभीर रूप से घायल हुए। पाकिस्तानी सेना के लगभग 4000 जवान मारे गए।

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इस युद्ध में देहरादून के 14, अल्मोड़ा के 3, बागेश्वर के 3, चमोली के 7, लैंसडौन के 10, नैनीताल के 5, पौड़ी के 3, पिथौरागढ़ के 4, रुद्रप्रयाग के 3, टिहरी के 11, उधम सिंह नगर के 2 और उत्तरकाशी के 1 जवान ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उत्तराखंड के मेजर विवेक गुप्ता को महावीर चक्र, मेजर राजेश सिंह भंडारी को महावीर चक्र, नाइक ब्रिजमोहन सिंह को वीर चक्र, नाइक कश्मीर सिंह को वीर चक्र, ग्रुप कैप्टन एके सिन्हा को वीर चक्र, आनरेरी कैप्टन खुशीमन गुरुंग को वीरचक्र, राइफलमैन कुलदीप सिंह को वीर चक्र, लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग को सेना मेडल, सिपाही चंदन सिंह को सेना मेडल, लांस नाइक देवेंद्र प्रसाद को सेना मेडल, नाइक शिव सिंह को सेना मेडल, नायक जगत सिंह को सेना मेडल, राइफलमैन ढब्बल सिंह को सेना मेडल, लांस नाइक सुरमन सिंह को सेना मेडल दिया गया था।

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इसके अलावा आनरेरी कैप्टन ए हेनी माओ को सेना मेडल और आनरेरी कैप्टन चंद्र सिंह को सेना मेडल दिया गया था। इसके अलावा कारगिल युद्ध में 13 जैक राइफल्स ने शौर्य और वीरता का जो इतिहास रचा। उसके लिए उसे ब्रैवेस्ट ऑफ ब्रैव यानी वीरों में सबसे वीर का खिताब मिला है। दिल मांगे मोर का नारा देने वाले परम वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्तरा 13 जैक के थे, जबकि कारगिल में परमवीर चक्र से सम्मानित रेजीमेंट के दूसरे सैनिक संजय कुमार हैं।भारतीय सैन्य इतिहास में ये पहली रेजीमेंट बनी जिसके दो सैनिकों को एक सैन्य अभियान में वीरता के सर्वश्रेष्ठ पदक परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। कारगिल में सैन्य इतिहास में वीरता की गाथा लिखने वाले 13 जैक रेजिमेंट पिछले कुछ अरसे से देहरादून कैंट में है। रेजिमेंट के परिसर में कारगिल युद्ध की वीर गाथा पर एक म्यूजियम है।


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