देवभूमि का अद्भुत रहस्य..पहाड़ में सच में चलती थी ‘बाण’ यानी ‘भूतों की टोली’ ?

आखिर बाण क्या होते थे ? क्या सच में पहाड़ के गांवों में सच में बाण की टोली चलती थी? आइए इस बारे में कुछ खास बातें जानते हैं।

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आज भी आप उत्तराखंड के गांवों में चले जाइए। वहां बड़े बुजुर्गों द्वारा कुछ दिलचस्प कहानियां सुनाई जाती हैं। कुछ बातें युवा पीढ़ी को याद रहती हैं और कुछ नहीं। इन्हीं में से एक कहानी है बाण यानी भूतों की टोली। उत्तराखंड के लगभग हर एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने अपने जिंदगी में “बाण कहे जाने वाले भूतों की टोली को महसूस किया और आभास किया है। कहा जाता था कि बाण (भादो और असूज) यानी सितंबर और अक्टूबर के महीने में चलते थे। ये टोली दोपहर और रात को 12 बजे के बाद चलती थी। बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है कि इस टोली में भूत पिचाश हुआ करते थे। यो हाथों में बरछी जैसा हथियार लिए रहते थे। इनका मक़सद इंसानों को मार कर उन्हें अपनी टोली में शामिल करना होता था। रात के वक्त अगर इन पिशाचों को किसी घर में उजाला दिखता था तो उस परिवार को मारकर ये अपनी टोली में शामिल कर लेते थे।

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कहा जाता रहा है कि इस बाण के आगे उत्तराखंड में ‘चंपवा देवता’ कहे जाने वाले देवता का रथ चलता था। चंपवा देवता लोगों को आगाह करते थे की जो लोग रास्ते में हैं, वो लोग हट जाएं या जो लोग जाग रहे हैं वे सचेत हो जाएं। चंपवा देवता के रथ के बाद भूतों की बाण चलती थी। बुजुर्ग कहते हैं कि देवता और भूतों द्वारा कही जाने वाली बातें लोगों को साफ सुनाई देती थी। देवता द्वारा कही जाने वाली चेतावनी होती थी “बाटा का अबाट” यानी रास्ते में मौजूद लोग रास्तों से हट जाएं। उसी तरह बाण के शब्द कुछ इस प्रकार होते थे “अबाटा का बाट”। यानी जो रास्तों पर नहीं चल रहे हैं, वो रास्तों पर आ जाएं। कहा जाता है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ काफ़ी समय तक उत्तराखंड के कई स्थानों पर चलती रही। इससे कई लोगों की मृत्यु भी हुई।

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आज भी ये कहानियां सुनकर बड़ा आश्चर्य होता है। मन में सवाल उठता है कि क्या सच में उत्तराखंड में ऐसा होता रहा होगा ? ऐसी ही कुछ कहानी खैंट पर्वत के बारे में भी सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि खैट पर्वत में परियों का वास है। खैट पर्वत टिहरी गढ़वाल में है। खास बात ये है कि इस पर्वत के चरणों में ही भिलंगना नदी है। खैट पर्वत गुंबद के आकार की एक मनमोहक चोटी है। व‌िशाल मैदान में मौजूद ये अकेला पर्वत अद्वितीय द‌िखाई देता है। कहा जाता है क‌ि खैट पर्वत की नौ श्रृंखलाएं हैं और यहां नौ परियां निवास करती हैं। हैरानी की बात तो ये भी है कि यहां वीरान जगह में खुद ही अखरोट और लहसुन की खेती होती है। अखरोट के बागान लुकी पीड़ी पर्वत पर हैं। यहां एक अजीब सी गुफा भी है, जहां भूलभुलैय्या है और यहां नाग की आकृतियां उकेरी हुई हैं। नैर-थुनैर नामक दो पेड़ भी यहां मौजूद हैं, जिसके पत्तों में में अजीब सी सुगंध आती है।
हमें खुशी है कि पहाड़ के युवा लगातार अपनी लेखनी से सभी को प्रभावित कर रहे हैं। टिहरी गढ़वाल की विकिता भट्ट ने ये ब्लॉग उत्तराखंड इनक्रेडिबल वेबसाइट के लिए लिखा है। हमें अच्छा लगा तो आप तक शेयर किया है। उम्मीद है कि आपको ये पसंद आएगा।


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