उत्तराखंड में एक IAS अफसर ऐसा भी, जो मुफ्त में मरीजों को इलाज करता है

उत्तराखंड में एक IAS अफसर ऐसा भी, जो मुफ्त में मरीजों को इलाज करता है

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जनता की मदद और सेवा करने के लिये दी जाने वाली कुर्सी पाकर कुछ अधिकारी जनता से ही दूरियां बना लेते हैं। लेकिन कुछ जियाले ऐसे भी हैं जो जनता की सेवा करना ही अपना फर्ज समझते हैं। हमारे समाज में बैठे हुक्मरान इस बात का दंभ भरते हैं कि वो गरीबों के मसीहा हैं लेकिमन सच ये है कि गरीबों का सिर्फ जिक्र होता है, फिक्र किसी को भी नहीं होती। आज इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने की आपाधापी में इतना उलझा हुआ है कि उसे ध्यान नहीं रहता कि पड़ोसी के हाल चाल क्या हैं ? इतनी आपाधापी के बाद भी उत्तराखंड में ऐसे जिलाधिकारी मौजूद हैं जो सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हैं। चम्पावत जिले के DM रहे डॉक्टर अहमद इक़बाल के बारे में कौन नहीं जानता ? जब भी अपनी ड्यूटी से फ्री होते तो सरकारी अस्पताल में बैठकर मरीजों का इलाज करने में जुट जाते।

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डॉक्टर अहमद इकबाल को जब भी वक्त मिलता, वो ड्यूटी के बाद लोगों के इलाज में जुट जाते। किसी से 1 रुपया नहीं लेते और दिन रात जनता की सेवा करते रहते। जब पहली बार चम्पावत के ज़िला अस्पताल में ज़िलाधिकारी खुद डॉक्टर बनकर मरीज़ों का इलाज करने लगे तो हर कोई हैरान रह गया। वैसे आपको ये भी बता दें कि जिलाधिकारी एक एमबीबीएस डॉक्टर भी हैं। 2009 में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मैंग्लोर मणिपुर विश्वविद्यालय से उन्होंने एमबीबीएस की। जिल़े के मुखिया ज़िला अस्पताल में बाकी डॉक्टरों की तरह ही मरीज़ों को देखते और इलाज करते। उनका कहना था कि खाली समय में मरीजों को देखना सबसे अच्छआ लगता है। इससे डॉक्टरों के ऊपर का दबाव तो कुछ कम होगा ही उनकी डॉक्टरी की पढ़ाई भी बेकार नहीं जाएगी। हालांकि, ज़िलाधिकारी की डॉक्टरी की वजह से लोगों को भी एक से ज़्यादा फ़ायदे हुए। लोग अपने मर्ज़ का इलाज तो करवा ही सके, साथ डीएम को अपनी समस्याएं भी बता देते।

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अहमद इकबाल का जन्म सामान्य किसान परिवार में हुआ। पिता इकबाल अहमद और मां साहीन ने समाज में गरीबी का मुंह देखा पर बेटे को पढ़ाने में कोई कंमी नहीं छोड़ी। डॉक्टर इकबाल अहमद की की तीन बहनें हैं। उन्होंने कानपुर से ही इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2009 में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मैंग्लोर मणिपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की। साल 2010 में उन्होंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास की। 2011 में वो सेवा में आए। चमोली, कर्णप्रयाग में एसडीएम रहे। इसके बाद रानीखेत में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रहे। अल्मोड़ा और टिहरी में सीडीओ का कार्य संभाला। इसके बाद एक जून 2016 को पहली बार चंपावत जनपद में उन्होंने जिलाधिकारी का कार्य संभाला। एक जून 2016 को चंपावत के डीएम बने डॉ. अहमद इकबाल अब शासन में अपर सचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे। 25 माह से अधिक का उनका कार्यकाल रहा जो जिले के 16 जिलाधिकारियों में दूसरा सबसे बड़ा कार्यकाल है।


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