जिस बेटी ने बॉक्सिंग में गोल्ड जीता, पहाड़ का मान बढ़ाया…वो 18 साल की उम्र में चली गई

जिस बेटी ने बॉक्सिंग में गोल्ड जीता, पहाड़ का मान बढ़ाया…वो 18 साल की उम्र में चली गई

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18 साल की बेटी, जिसके खेल को देखकर हर कोई हैरान था। जिस बेटी ने बड़ी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर उत्तराखंड का नाम रोशन किया था। बॉक्सिंग की एक एक खिलाड़ी, जिसके आगे विरोधी घुटने टेक देते थे। 18 साल की उस बेटी ने जब खुदकुशी की, तो हर कोई दंग रह गया। पिथौरागढ़ जिले में मुवानी क्षेत्र की मुगरोली गांव निवासी थी गीतिका राठौर। अचानक एक खबर निकलकर सामने आई कि गीतिका ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर दी है। ऐसा गीतिका ने क्यों किया, इसके पीछे कुछ वजह भी हैं। बताया जा रहा है कि देहरादून में एक कॉम्पिटीशन के दौरान गीतिका का घुटना टूट गया था। इस वजह से गीतिका लगातार अवसाद में जा रही थी। हालांकि घुटने को प्रत्यारोपित तो किया गया लेकिन गीतिका इस घुटने की वजह से प्रैक्टिस नहीं कर पा रही थी।

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साल 2015 में गीतिका ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस दौरान गीतिका ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इससे गीतिका काफी उत्साहित थी। इस बीच देहरादून में एक और कॉम्पिटीशन चल रहा था। इस कॉम्पिटीशन के दौरान गीतिका के घुटने में चोट लग गई थी। घुटने का ऑपरेशन किया गया लेकिन दर्द बरकरार था। ये दर्द गीतिका को जीने नहीं दे रहा था। लगातार प्रैक्टिस पर असर पड़ रहा था और गीतिका का देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना भई दूर हो रहा था। अपने भविष्य को लेकर परेशान गीतिका अब अवसाद में जाने लगी थी। इस वक्त अगर कोई उसे दिमागी रूप से मजबूत बनाता तो शायद वो बच सकती थी। अवसादग्रस्त गीतिका ने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा। स्पोर्ट्स कॉलेज में गीतिका के कोच रहे ललित कुंवर का कहना है कि गीतिका एक जुनूनी बॉक्सर थी।

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बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे गीतिका ने जहरीला पदार्थ खाया। उल्टी हुई, तो मां को इस बारे में पता चला। आनन-फानन में 108 वाहन से उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गौचर लाया गया। यहां इलाज के बाद उसे पिथौरागढ़ रेफर कर दिया गया। लेकिन रास्ते में गीतिका ने दम तोड़ दिया। 2016 में जनवरी और अप्रैल में गीतिका ने नेशनल प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व किया था। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया। गीतिका सिर्फ एक बॉक्सर नहीं बल्कि पढ़ाई में भी होशियार लड़की थी। गीतिका के पिता डिग्री कॉलेज मुवानी में चौकीदार के पद पर तैनात हैं। गीतिका का एक छोटा भाई भी है। नवीं कक्षा में ही गीतिका ने बॉक्सिंग की शुरूआत की थी और अपने प्रदर्शन को निखारकर अब अच्छे मुकाम पर पहुंची थी। लेकिन एक घटना ने सब कुछ छीन लिया।


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