पौड़ी हादसे में सामने आया हेली कंपनियों का क्रूर चेहरा, 'बकाया' होने के कारण नहीं की घायलों की मदद

पौड़ी हादसे में सामने आया हेली कंपनियों का क्रूर चेहरा, 'बकाया' होने के कारण नहीं की घायलों की मदद

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उत्तराखंड के पौड़ी में कल एक भीषण बस हादसा हो गया था, जिसमें पहले 25 लोगों की मौत की खबर थी, जो बाद में बढ़कर 48 हो गयी। समय पर मदद मिलती तो शायद कुछ जानें बच सकती थी। यहाँ दुर्भाग्यपूर्ण ये भी रहा कि घायलों की मदद में वक्त लग गया। पाता लगा है कि धुमाकोट बस हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने तत्काल ही घायल लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए अस्पताल तक पहुंचाने के निर्देश जारी किये थे। पर निजी हेली आपरेटरों की समझ में शायद आज इंसान की कीमत पैसे के सामने कुछ भी नहीं, निजी ऑपरेटर ने पिछला बकाया भुगतान न होने की बात कहते हुए तीन घंटे तक मदद के हेलीकप्टरों की उड़ान नहीं की। इस भीषण घटना के वक्त जब कई लोग घायल थे, चीख-चिल्ला रहे थे, ये निजी हेली आपरेटर सरकार से पहले अपना बकाये का भुगतान करने की बात कर रहे थे। दोपहर बाद किसी तरह धुमाकोट के लिए पहली उड़ान भरी गयी। तब तक इस भीषण बस हादसे में कई जिंदगियां समाप्त हो चुकीं थीं।

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धूमाकोट में इस विभीत्स बस हादसे की खबर सुबह 9 बजे ही सोशल मीडिया में आ गयी थी, जिसके तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आ गया था। सरकार ने भी 9:30 तक घायलों के बचाव के लिए हेलीकॉप्टर के जरिए SDRF टीम को धुमाकोट रवाना होने के निर्देश दे दिए थे। जिसके बाद SDRF टीम 10:30 तक सहस्रधारा हेलीपैड पहुंच गयी थी। इस नाजुक मौके पर हेरिटेज एवीएशन ने उड़ान भरने से मना कर दिया। इस भीषण बस दुर्घटना में जब कई लोग तड़प रहे थे, तब कंपनी ने सरकार से पिछला बकाया भुगतान न होने की शिकायत करते हुए, उड़ान भरने से साफ इनकार कर दिया। यहाँ हम आपको बताना चाहेंगे कि SDRF की पूरी टीम DIG पुष्पक ज्योति के नेतृत्व में 1:00 बजे तक सहस्रधारा हेलीपैड पर रुकने को विवश रही। पहली उड़ान में राहत सामग्री और जवानों के बाद दूसरी उड़ान में सीएम त्रिवेंद्र, क्षेत्रीय विधायक धन सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट धुमाकोट के लिए रवाना हुए।
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सूत्रों के मुताबिक हैरिटेज एविएशन का करीब डेढ़ करोड़ रुपया कोंग्रेस की पिछली सरकार के समय से बकाया है। इसके बाद ये रकम और बढ़ गयी है। मामले पर अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने मीडिया को बताया कि कंपनी ने पिछला भुगतान किए बिना सेवा देने से सुबह एक बार मना कर दिया था। फिर मैने स्वयं, कंपनी के प्रबंधन से बात की। प्रबंधन से साफ किया गया कि संकट के समय इस तरह की शर्त रखनी ठीक नहीं है। यह विषय बाद में देखा जा सकता है। इसके बाद कंपनी अपनी सेवाएं देने के लिए राजी हुई। यहाँ दुर्भाग्य पूर्ण बात ये भी है कि चारधाम यात्रा के दौरान येही एवियेशन कम्पनियां उत्तराखंड से ही रूपया कमाती हैं, और बात जब उत्तराखंड के ही निवासियों की ऐन मौके पर मदद की हो तो उड़ाने रोक दी जाती हैं। मामले पर क्षेत्रीय विधायक और केबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने भी एवियेशन कम्पनी की निंदा की और कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।


Uttarakhand News: Crual face of Heli Company stoped help for money

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