उत्तराखंड में मानसून का स्वागत 'बरखा झुकी एग्ये' के साथ, नेगी दा का नया अंदाज सुपरहिट है

उत्तराखंड में मानसून का स्वागत 'बरखा झुकी एग्ये' के साथ, नेगी दा का नया अंदाज सुपरहिट है

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नरेंद्र सिंह नेगी। गढ़रत्न। उत्तराखंड के कालजयी कवि। नेगी जी ने उत्तराखंड की प्रकृति को अपने ही शब्दों में पिरोकर कुछ ऐसी रचनाएं लिखी हैं, जो चिर समय तक श्रोताओं को नयी सी ही लगती रहेंगी। इस साल उत्तराखंड में होली का स्वागत नेगी दा के 'होरी एग्ये' से हुआ था, अब मानसून की शुरुवात भी नेगी दा के 'बरखा झुकी एग्ये' से हुई है। नेगी जी के किसी भी गीत को आज भी सुन लें, पहाड़ की एक खूबसूरत तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है। उत्तराखंड के प्रवासी तो नेगी जी के गीत सुन-कर ही अपनी मातृभूमि को याद करते हैं। हाल ही में, 30 जून को नेगी जी के एक ऐसे ही कालजयी गीत के विडियो का विमोचन देहरादून में ऑफिसर ट्रांजिट हास्टल में हुआ। एक पल के लिए सोचिये... मानसून शुरू हो गया है, घर के बाहर झमाझम बारिश पड़ रही है और आपके सामने नेगी जी अपना सदाबहार गीत 'बरखा झुकी एग्ये' गा रहे हैं। ट्रांजिट होस्टल के सभागार का मानसून शुरू होते ही कुछ ऐसा ही नजारा था। नरेन्द्र सिंह नेगी जी द्वारा लिखे और गाये गए इस गीत में संगीत ज्वाला प्रसाद का है जबकि एडिटिंग और छायांकन गोविन्द नेगी का है। गीत का विडियो भी बेहतरीन बना है और ये शानदार गीत सुनते हुए सीधा पहाड़ के सामान्य जनजीवन को छूता है। गीत देखकर आप अपने गाँव की यादों में खो जायेंगे।

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