रुद्रप्रयाग के आपदा पीड़ित गांव की बेटी, गरीबी से लड़कर जलाई स्वरोजगार की मशाल

रुद्रप्रयाग के आपदा पीड़ित गांव की बेटी, गरीबी से लड़कर जलाई स्वरोजगार की मशाल

Story of roshni chauhan mushroom girl from kalimath  - Uttarakhand news, roshni chauhan ,उत्तराखंड,

कहते हैं कि अगर हौसलों में ताकत है, तो सपनों को पूरा करन का जुनून दिल में जागता है। रास्ते खुद-ब-खुद बनते जाते हैं और मुसाफिर मंजिल तक पहुंच ही जाता है। आज एक ऐसी ही कहानी हम आपको बता रहे हैं। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में एक गांव पड़ता है, जिसका नाम है कविल्ठा। इस गांव की बेटी रोशनी चौहान आज हर किसी के लिए प्रेरणा बनती जा रही हैं। कभी अपनी मां से लड़कर 3 हजार रुपये में अपना बिजनेस शुरू करने वाली ये बेटी अब स्वरोजगार की मिसाल है। रोशनी ने आज मशरूम उत्पादन को अपना हथियार बना दिया है और खास बात ये भी है कि इस बेटी ने कहीं से मशरूम उत्पादन की प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी नहीं ली है। दरअसल केदारघाटी में 2013 की आपदा के बाद रोशनी के गांव में एक NGO के लोग आए थे।

यह भी पढें - देवभूमि की बेटी ने इंजीनियरिंग छोड़ी और पहाड़ों को चुना...अब सफलता की बुलंदियों पर
NGO ने गांव वालों को मशरूम उत्पादन सिखाया लेकिन रोशनी ने ये सब दूर से ही देखा और सीख लिया। इसके बाद मशरूम गर्ल दिव्या रावत भी एक बार रोशनी के गांव आई, तो रोनी ने NGO से जुड़े सदस्यों से कहा कि उन्हें भी मशरूम उत्पादन सीखना है। इसके बाद रोशनी ने फ्री में NGO के मशरूम की देख रेख करना शुरू कर दिया। घर वालों और गांव वालों से ताने सुनने को मिले कि आखिर फ्री में क्यों काम कर रही हो, लेकिन रोशनी ने किसी की नहीं सुनी और अपना काम करती गई। इसके बाद 2016 के सितंबर महीने में रोनी ने मां से 3 हजार रुपये लिए और अपना काम शुरू करने की सोची। 3 हजार रुपये से कुछ बीज खरीदे और पहली परीक्षा भी दे दी। जिस कमरे में रोशनी ने मशरूम उत्पादन किया था, वहां हर रोज सुबह जाकर देखती कि मशरूम उगा या नहीं।

यह भी पढें - उत्तराखंड पुलिस का काम तारीफ के काबिल है
25 दिन बीत गए थे और रोशनी की हिम्मत जवाब देने लगी थी लेकिन उम्मीदें नहीं टूटी। 26 वें दिन जब रोशनी उस कमरे में गई तो देखा कि सारे मशरूम खिल चुके थे। शायद आप रोशनी की खुशी का अंदाजा नहीं लगा सकते कि 26 वें दिन उन्हें कैसा हौसला मिला होगा। इन 26 दिनों में रोशनी को लोगों द्वारा ये भी सुनना पड़ा था कि ‘ये लड़की घर में ज़हर उगा रही है’। अब जब मेहनत रंग लाई है तो रोशनी को हर कोई सलाम करता है। आज रोशनी के मशरूम कविल्ठा से श्रीनगर होते हुए दिल्ली पहुंचने वाले हैं। कमाई तो पूछिए ही मत और सबसे बड़ी बात ये है कि अपने पैरों पर खड़े होकर इस बेटी ने केदारघाटी का नाम रोशन कर दिया। राज्य समीक्षा के माध्यम से हम आपको बेटियों से जुड़ी छोटी-बड़ी कहानियां बताते रहते हैं। रोशन के हौसले को सलाम और भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।


Uttarakhand News: Story of roshni chauhan mushroom girl from kalimath

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें