क्या उत्तराखंड एक साजिश का शिकार हो गया ? क्या 27 जून को ही ये तय हो गया था ?

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इस वक्त उत्तराखंड के शहर, गली, नुक्कड़, मोहल्ले और गांवों में बस एक ही चर्चा है। चर्चा उत्तरा पंत बहुगुणा की हो रही है। एक तरफ सरकार और दूसरी तरफ उत्तर पंत बहुगुणा। जाहिर है कि जनभावनाएं उत्तरा पंत बहुगुणा के साथ हैं और कांग्रेस के लिए ये एक बड़ा मुद्दा बन गया है। 2019 के चुनाव में तो कांग्रेस इस गोल्डन चांस को भुनाने में अभी से जुट गई है। लेकिन अब धीरे धीरे कुछ खुलासे भी हो रहे हैं। ये बात भी लोग कह रहे हैं कि सीएम को गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए था लेकिन उत्तरा पंत बहुगुणा को भी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। 28 जून को सीएम त्रिवेंद्र के जनता दरबार में बवाल हुआ। इससे ठीक एक दिन पहले 27 जून को उत्तरा पंत बहुगुणा के फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट डाली गई। पोस्ट के जरिए ऐलान पहले ही कर दिया गया था कि ‘अब मैं सरकार को छोड़ने वाली नहीं’। ठीक अगले दिन जनता दरबार में हंगामा और उसके एक दिन बाद कांग्रेस द्वारा हर तहसील स्तर तक प्रदर्शन।

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सवाल ये है कि क्या से सब कुछ पहले से तय था ? उत्तराखंड इस वक्त साफ तौर पर दो धड़ों में बंट चुका है। एक धड़ा वो है...जिसने अपनी आंखों के आगे सारा खेल होते देखा। दूसरा धड़ा वो है, जिसने इस खेल को होते हुए भी देखा और इसके बाकी पहलुओं को सामने रखा। पहले आप उत्तरा पंत बहुगुणा की 27 जून को डाली गई ये पोस्ट देखिए। इसके ठीक एक दिन बाद हंगामा हो गया था।

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उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार अजय ढौंढियाल के मुताबिक ‘पूरी दाल ही काली लग रही है। लगता है सब प्री प्लान्ड था। सियासी घमासान छेड़ने के लिए पहले से ही आरटीआई से दूसरी जानकारियां भी इकट्ठा करा ली गई थीं। यानी सियासी हथियार पैने कर दिए गए थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि हथियारों को चलाने के लिए एक लाचार शिक्षिका के कंधे का इस्तेमाल किया गया हो ‘? वैसे आपको बता दें कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों हाथ ले लिया है और पूरे उत्तराखंड में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहा है। बीते 3 साल से उत्तरा पंत बहुगुणा स्कूल से बिना बताए छुट्टी पर थीं। क्योंकि उन्हें उनकी मनपसंद जगह नहीं मिली थी। दो बार उत्तरा पंत बहुगुणा को सस्पेंड भी किया गया था और सबसे बड़ी बात ये भी तो है कि जिस जनता दरबार में सरकारी कर्मियों का आना ही मना है, वहां उत्तरा पंत बहुगुणा कैसे पहुंची ? प्रश्न कई हैं और इन यक्ष प्रश्नों का जवाब देने के लिए उत्तराखँड में कोई नहीं। राजनीति जारी है।


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