Video: पप्पू कार्की...मौत के 21 दिन बाद आया जन्मदिन, ये आखिरी गीत जरूर सुनें

Video: पप्पू कार्की...मौत के 21 दिन बाद आया जन्मदिन, ये आखिरी गीत जरूर सुनें

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पहले ये गीत जरूर सुनिए। ‘फूलों में भौरों में होली, तेरी मेरी बाता…जून तू होली मेरी, मै जून्याली राता’। सुनकर दिल एक बार फिर भर आया। वो जो शब्दों का शंहशाह था, वो जो उत्तराखंड के संगीत का बेताज बादशाह था। आज उस पप्पू कार्की का जन्मदिन है। आप भूले तो नहीं ना ? 21 दिन पहले उत्तराखंड ने एक सितारा खोया था और आज उस सितारे का जन्मदिन है। मौत के 21 दिन बाद जन्मदिन आया है। कैसा घोर कालचक्र है ? ऊपर वाले की ये कैसी लीला है ? अपनी हर रचना में पहाड़ और पहाड़ की बातें करना पप्पू कार्की का शगल था। ना जाने कितनीं आंखें उनके गीतों को सुनकर नम हुई होंगी, ना जाने कितनी बार उनके गीतों पर पैर थिरके होंगे, ना जाने कितनी बात पहाड़ से दूर रहने वालों की आंखों में आंसू आए होंगे, ना जाने कितनी बार उनके गीत चेहरे पर मुस्कान दे गए होंगे।

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पप्पू कार्की और संगीत एक सिक्के के दो पहलू थे। जहां जाएं, वहां लोगों की भीड़ उमड़ जाए। ‘पप्पू दा का शो ठहरा यार...हिटो पे’ अब ऐसा कहने वाला कोई नहीं। हमारे बीच सिर्फ उनकी यादें और उनके गीत हैं। आज तुमसे ये तो नहीं कह सकते कि"तुम जियो हजारों साल "। लेकिन ये भी नहीं भूल सकते कि आज तुम्हारा हैप्पी बर्थडे है। किसी ने पप्पू कार्की के परिवार के लिए बड़ा दिल दिखाया, तो किसी ने उनके बेटे की पढ़ाई का जिम्मा लिया। डीडीहाट के रहने वाले हरीश चुफाल बताते हैं कि पप्पू कार्की को लाल चावल बेहद पसंद थे। इस बार मां ने लाल चावल बोए थे। लेकिन ददा खुद ही चला गया’। पप्पू कार्की की मां गांव में ही हैं और पत्नी हल्द्वानी में हैं। हल्द्वानी में पप्पू कार्की का स्टूडियो है, उसकी देखभाल भी तो करनी है। नम आंखों से श्रद्धांजलि दी जा रही है। भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।

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Uttarakhand News: Happy birth day pappu karki

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