उत्तराखंड देहरादूनYashpal Arya Demands Scrapping of Agnipath Scheme

उत्तराखंड में उठी अग्निवीर योजना खत्म करने की मांग, बहाल हो पुरानी नियमित स्थायी भर्ती!

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अग्निपथ योजना को समाप्त कर सेना में पुरानी नियमित भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। उन्होंने अग्निवीरों को स्थायी सेवा, समान अधिकार, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा देने के साथ रिक्त पद भरने की भी मांग उठाई।

Agniveer Scheme News: Yashpal Arya Demands Scrapping of Agnipath Scheme
Image: Yashpal Arya Demands Scrapping of Agnipath Scheme (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अग्निपथ योजना को देश की सुरक्षा, सेना के गौरव और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। आर्य ने कहा कि सेना में पहले की तरह नियमित सैनिक भर्ती व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।

Yashpal Arya Demands Scrapping of Agnipath Scheme

शुक्रवार को जारी बयान में यशपाल आर्य ने कहा कि कांग्रेस अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से ही इसका विरोध कर रही है। अब पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद 75 प्रतिशत जवानों की सेवा समाप्त होने का सवाल सामने है। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने की चर्चा युवाओं की चिंताओं का समाधान नहीं है। उनके अनुसार, इस तरह की चर्चा से योजना को लेकर उठ रहे सवाल और उसकी खामियां सामने आई हैं।

नियमित भर्ती और स्थायी सेवा की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से अग्निपथ योजना समाप्त कर सेना में नियमित भर्ती व्यवस्था शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को स्थायी सेवा और समान अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता खत्म हो सके।

रिक्त पद भरने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

यशपाल आर्य ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रभावित युवाओं को न्याय दिलाना, सेना में रिक्त पदों को भरना, जवानों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा आत्महत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के भविष्य की सुरक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।