देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शुक्रवार को उर्मिला सनावर कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने नार्को टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि उनका नार्को टेस्ट कराया जाता है, तो अंकिता भंडारी, नीलम और अंकित से जुड़े मामलों के कई राज सामने आ सकते हैं। उन्होंने पूरे मीडिया के सामने अपना नार्को टेस्ट कराने की मांग भी उठाई। उर्मिला सनावर के इस बयान के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP की भूमिका को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, उनके दावों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।
Urmila Sanawar Demands Narco Test in Ankita Bhandari Case
उर्मिला सनावर ने पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और दुष्यंत गौतम पर अंकित हत्याकांड में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि नार्को टेस्ट से इस मामले से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। उन्होंने अंकित की मौत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उर्मिला के अनुसार, अंकित को सुरेश राठौड़ का नौकर बताया जाता था और उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंककर मार दिया गया था। उन्होंने नार्को टेस्ट के जरिए इस मामले सहित अन्य हत्याकांडों से जुड़े राज सामने आने की बात कही। हालांकि, सुरेश राठौड़ और दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता और उनकी सत्यता का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
सहारनपुर की उर्मिला सनावर उत्तराखंड में क्यों रहती हैं चर्चा में?
सहारनपुर की रहने वाली उर्मिला सनावर आए दिन नए-नए मुद्दों को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं। उत्तराखंड से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक मामलों में उनकी सक्रियता अक्सर सुर्खियों में रहती है। कभी उनके निजी मामलों को लेकर चर्चा होती है, तो कभी किसी सामाजिक मुद्दे पर उनके बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं।आगे पढ़िए..
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उर्मिला सनावर सहारनपुर की रहने वाली हैं, लेकिन उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती है। इसी वजह से उनकी भूमिका को लेकर भी बहस होती रहती है। उनकी उत्तराखंड में राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ आलोचकों का मानना है कि वह सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक बहस का रूप देती हैं और इस तरह लगातार सार्वजनिक चर्चा में बनी रहती हैं। हालांकि, उनकी मंशा को लेकर किए जाने वाले ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
UKD कार्यकर्ता के माइक लगाने का मामला भी आया था चर्चा में
इससे पहले एक घटना को लेकर भी उर्मिला सनावर चर्चा में आई थीं, जब एक उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ता ने उनके कॉलर पर माइक लगा दिया था। इस घटना को लेकर उर्मिला सनावर ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। यह घटना भी उस समय चर्चा का विषय बनी थी। इस मामले के बाद उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हुईं।
अंकिता भंडारी मामले से राजनीतिक फायदा उठाने के लग रहे आरोप
अब अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उर्मिला सनावर की सक्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वह इस संवेदनशील मामले के जरिए अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने और सुर्खियों में बने रहने की कोशिश कर रही हैं। आलोचकों के बीच यह आरोप भी चर्चा में है कि अंकिता भंडारी मामले को लेकर उनकी सक्रियता से उन्हें राजनीतिक फायदा मिल सकता है।
चर्चा में बने रहने की राजनीति या गंभीर मुद्दों को उठाने की कोशिश?
उर्मिला सनावर को लेकर आलोचकों के बीच यह धारणा भी व्यक्त की जाती है कि वह विवादित मुद्दों पर मुखर होकर सार्वजनिक चर्चा में बनी रहती हैं। उनके आलोचकों का आरोप है कि उनके लिए किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में रहना महत्वपूर्ण होता है, चाहे उस पर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हों या नकारात्मक। अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे गंभीर मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में कौन से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं। इसलिए उर्मिला सनावर के बयानों, उनकी नार्को टेस्ट की मांग और उनकी राजनीतिक सक्रियता से जुड़े सवालों को तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है।
अंकिता भंडारी केस में आगे क्या होगा?
उर्मिला सनावर की नार्को टेस्ट की मांग और उनके ताजा आरोपों के बाद अब संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। नार्को टेस्ट की मांग करना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता। इस तरह के परीक्षण की कानूनी स्वीकार्यता और उपयोगिता भी निर्धारित नियमों तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होती है। फिलहाल, उर्मिला सनावर के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले से जुड़े किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों का इंतजार करना जरूरी है।