उत्तराखंड पौड़ी गढ़वालWoman Killed in Leopard Attack in Uttarakhand

उत्तराखंड: गुलदार के हमले में महिला की मौत, आदमखोर घोषित करने की मांग लेकर हाईवे पर उतरे ग्रामीण

पौड़ी गढ़वाल के खंडाह क्षेत्र के तरुली-बछेली गांव में गुलदार के हमले से महिला की मौत के बाद ग्रामीणों ने श्रीनगर-पौड़ी-कोटद्वार हाईवे पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने और मृतका के इकलौते बेटे को रोजगार देने की मांग की।

Pauri Garhwal Leopard Attack: Woman Killed in Leopard Attack in Uttarakhand
Image: Woman Killed in Leopard Attack in Uttarakhand (Source: Social Media)

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार के हमले में महिला की मौत के बाद लोगों में आक्रोश है। खंडाह क्षेत्र के तरुली-बछेली गांव में हुई इस घटना के विरोध में ग्रामीणों ने श्रीनगर-पौड़ी-कोटद्वार हाईवे पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने की कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को उसके आतंक से राहत मिल सके।

Woman Killed in Leopard Attack in Uttarakhand, Villagers Block Highway

ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में गुलदार लगातार सक्रिय है और हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बताया गया कि एक वार्ड में गुलदार के हमले की छह से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें यह तीसरी मौत है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों को अपने रोजमर्रा के कामों के लिए भी सतर्क रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में गुलदार के खतरे से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। आगे पढ़िए..

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प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मृत महिला के इकलौते पुत्र को रोजगार देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि महिला अपने परिवार का सहारा थीं और उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतका के बेटे अरविंद रावत ने बताया कि उनकी मां ने जीवनभर संघर्ष कर उन्हें पाला-पोसा। मां को खोने का दुख परिवार के लिए बेहद गहरा है।

गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

महिला की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। खासकर मृतका की सास इस दुखद घटना से टूट गई हैं। ग्रामीणों में घटना को लेकर गम के साथ आक्रोश भी है। वे चाहते हैं कि क्षेत्र में गुलदार के हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।