देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती बिजली मांग के बीच ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत राज्य में चार बड़े Battery Energy Storage System (BESS) प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएंगे। इनकी कुल क्षमता 76 मेगावाट यानी 190 मेगावाट-ऑवर होगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इन परियोजनाओं के लिए निर्धारित टैरिफ और पावर खरीद समझौते के मसौदे को सशर्त मंजूरी दी है।
Uttarakhand to Build Four Mega Battery Storage Projects
चारों मेगा बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इनमें देहरादून के ढकरानी में 30 मेगावाट, ऊधमसिंह नगर के खटीमा में 15 मेगावाट और हरिद्वार के पथरी में 16 मेगावाट क्षमता का प्रोजेक्ट पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी द्वारा स्थापित किया जाएगा। वहीं उत्तरकाशी के तिलोथ में 15 मेगावाट क्षमता का प्रोजेक्ट आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड स्थापित करेगी।
तीन प्रोजेक्ट पतंजलि, एक आर्मी इन्फोटेक को
इन प्रोजेक्ट्स के लिए यूजेवीएनएल ने खुली ई-निविदा प्रक्रिया आयोजित की थी। इसमें पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने चारों प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम दरें कोट की थीं। हालांकि, टेंडर की शर्तों के मुताबिक एक कंपनी को अधिकतम दो प्रोजेक्ट ही दिए जा सकते थे। इसके बाद तिलोथ प्रोजेक्ट पतंजलि ने छोड़ दिया। इसके बाद एल-2 बिडर आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड ने पतंजलि की सबसे कम बोली पर तिलोथ प्रोजेक्ट को लेने की सहमति दी। नियामक आयोग की पीठ में अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी शामिल थे।
दिल्ली और पंजाब से कम तय हुई BESS दरें
आयोग के अनुसार, उत्तराखंड में तय की गई BESS दरें दिल्ली और पंजाब में हाल में मंजूर दरों से कम हैं।
ढकरानी: ₹2,69,832 प्रति मेगावाट/माह
पथरी: ₹2,79,501 प्रति मेगावाट/माह
खटीमा: ₹2,79,782 प्रति मेगावाट/माह
तिलोथ: ₹2,80,000 प्रति मेगावाट/माह
तुलना के लिए आयोग ने बताया कि दिल्ली में 12.5 मेगावाट के एक प्रोजेक्ट के लिए करीब ₹2.99 लाख प्रति मेगावाट/माह और पंजाब में करीब ₹3.35 लाख से ₹3.44 लाख प्रति मेगावाट/माह की दरें मंजूर हुई हैं।
केंद्र की VGF योजना से मिलेगी वित्तीय सहायता
इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की Viability Gap Funding (VGF) योजना के तहत भी वित्तीय सहायता मिलेगी। पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड के तहत उत्तराखंड को कुल 500 मेगावाट-ऑवर क्षमता आवंटित की गई थी। इसमें से 250 मेगावाट-ऑवर क्षमता का क्रियान्वयन यूजेवीएनएल के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत केंद्र सरकार प्रति मेगावाट-ऑवर ₹18 लाख की वित्तीय सहायता तीन किस्तों में उपलब्ध कराएगी।
दिन में चार्ज होंगी बैटरियां, शाम को मिलेगी बिजली
इन बैटरी स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली की मांग के पीक समय में किया जाएगा। दिन या सामान्य घंटों के दौरान जब सस्ती सौर और जलविद्युत उपलब्ध होगी, तब यूपीसीएल की ओर से बैटरियों को चार्ज किया जाएगा। इसके बाद शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच जब बिजली की मांग चरम पर होती है, बैटरियों में स्टोर बिजली को ग्रिड में सप्लाई किया जाएगा।
पीक आवर्स में महंगी बिजली खरीद की जरूरत घटेगी
शाम के पीक आवर्स में बिजली की मांग बढ़ने पर राज्य को अक्सर अतिरिक्त बिजली की जरूरत होती है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम से उस समय ग्रिड को बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। इससे राज्य को पीक डिमांड के दौरान राष्ट्रीय बिजली एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही ग्रिड पर बढ़ने वाले दबाव को संभालने और ग्रिड ट्रिपिंग की समस्या कम करने में भी ये सिस्टम उपयोगी हो सकते हैं।