उत्तराखंड पिथौरागढ़Nepal Landslide Lake Raises Concern in Uttarakhand

उत्तराखंड: भारत से सिर्फ 40 KM दूर बनी झील, चमेलिया नदी ने रौद्र रूप लिया तो खतरे में आएंगे 50 हजार लोग

Uttarakhand News: नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से बनी झील भारत की सीमा से करीब 40 किमी दूर है। चमेलिया नदी के महाकाली में मिलने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ी, काली नदी चेतावनी स्तर के करीब पहुंची।

Nepal Landslide Lake: Nepal Landslide Lake Raises Concern in Uttarakhand
Image: Nepal Landslide Lake Raises Concern in Uttarakhand (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: नेपाल के दार्चुला जिले के भट्टार क्षेत्र में भूस्खलन के बाद एक झील बनने की सूचना ने भारत के सीमावर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि भट्टार में झील बनने वाला स्थान भारतीय क्षेत्र से हवाई दूरी में करीब 40 किलोमीटर दूर है। स्थिति को देखते हुए भारत की ओर सीमावर्ती क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

Nepal Landslide Lake Raises Concern in Uttarakhand

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता की वजह नदियों का आपसी जुड़ाव है। नेपाल की चमेलिया नदी आगे जाकर महाकाली नदी में मिलती है। महाकाली नदी भारत और नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में नेपाल की ओर नदी के प्रवाह में किसी बड़े बदलाव का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है।

कालापानी से टनकपुर तक सीमा बनाती है काली नदी

पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अनुसार, काली नदी कालापानी से टनकपुर तक भारत और नेपाल के बीच सीमा का कार्य करती है। इसके बाद यही नदी मैदानी क्षेत्रों की ओर शारदा नदी के नाम से आगे बढ़ती है।
भारत की ओर महाकाली नदी का प्रवाह कई महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जिनमें धारचूला, जौलजीबी, झूलाघाट, बलुवाकोट, टनकपुर और आसपास के क्षेत्र, काली नदी चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे शामिल हैं। धारचूला क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद काली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बताया गया है कि नदी चेतावनी स्तर से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
चेतावनी स्तर: 889 मीटर
वर्तमान जलस्तर: 888.90 मीटर
नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा और झूलाघाट समेत कई नदी किनारे बसे क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे जाने से बचने की अपील की है।

50 हजार से अधिक आबादी पर मंडरा सकता है खतरा

यदि नेपाल में बनी झील या नदी के प्रवाह से किसी तरह की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि पिथौरागढ़ के कई गांवों के साथ-साथ चंपावत और टनकपुर क्षेत्र तक असर पड़ सकता है। संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में गेठीगड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव और हल्दू शामिल हैं। इसके अलावा चंपावत के सीमावर्ती गांवों और नेपाल के कई इलाकों में भी खतरे की आशंका जताई जा रही है।

बनबसा बैराज पर लगातार चौथे दिन रेड अलर्ट

भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच बनबसा बैराज पर भी लगातार चौथे दिन रेड अलर्ट की स्थिति बनी रही। शुक्रवार को शारदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता दर्ज किया गया। दोपहर करीब दो बजे नदी में 1,31,334 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। आगे पढ़िए..

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इससे पहले जलस्तर लगातार बढ़ता रहा—
सुबह 6 बजे: 1,02,342 क्यूसेक
सुबह 8 बजे: 1,14,906 क्यूसेक
सुबह 10 बजे: 1,18,710 क्यूसेक
दोपहर 12 बजे: 1,25,446 क्यूसेक
दोपहर 1 बजे: 1,29,582 क्यूसेक
सुरक्षा के मद्देनजर बैराज से चार पहिया वाहनों के संचालन पर रोक जारी रही।

एक लाख क्यूसेक से नीचे आने पर शुरू होगा वाहनों का संचालन

बैराज प्रशासन के अनुसार, शारदा नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से कम होने के बाद ही चार पहिया वाहनों के संचालन पर लगी रोक हटाई जा सकती है। बताया गया है कि एक जून से अब तक क्षेत्र में करीब 1180 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जिसके कारण नदी-नाले लगातार उफान पर हैं।

घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर भूस्खलन, आवाजाही ठप

पिथौरागढ़ जिले में लगातार बारिश के कारण सड़कें भी प्रभावित हो रही हैं। शुक्रवार देर शाम हुई बारिश के बाद घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी दरक गई। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दिल्ली से पिथौरागढ़ आने वाली बस भी रास्ते में फंस गई, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

दरकते पहाड़ के बीच सड़क खोलना बना चुनौती

सूचना मिलने के बाद सड़क खोलने के लिए जेसीबी मशीन मौके पर भेजी गई। हालांकि लगातार पहाड़ी दरकने और बोल्डर गिरने के कारण मलबा हटाने का काम चुनौतीपूर्ण बना रहा। देर रात तक सड़क को पूरी तरह खोला नहीं जा सका। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि मार्ग को जल्द खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी

नेपाल में भूस्खलन के बाद बनी झील और लगातार बढ़ते नदी जलस्तर को देखते हुए भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन सतर्क है। हालांकि किसी संभावित बड़े खतरे की स्थिति को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।