उत्तराखंड देहरादूनFormer CM Khanduri Remembered for Clean Governance and Road Revolution

B.C Khanduri: ‘खंडूरी हैं जरूरी’, जब उत्तराखंड ने एक सुर में उठाई थी आवाज; सड़कों पर था जनसैलाब

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए भारत की आधुनिक सड़क संरचना को नई पहचान दी। उनका कार्यकाल सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार राजनीति के लिए याद किया जाता है।

Bhuvan Chandra Khanduri RIP: Former CM Khanduri Remembered for Clean Governance and Road Revolution
Image: Former CM Khanduri Remembered for Clean Governance and Road Revolution (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Bhuvan Chandra Khanduri को भारत की आधुनिक सड़क संरचना का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना को तेजी मिली, जिसके तहत दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों को आधुनिक हाईवे नेटवर्क से जोड़ा गया। उन्होंने इस परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया।

Former CM Khanduri Remembered for Clean Governance and Road Revolution

पूर्व CM Bhuvan Chandra Khanduri ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के जरिए ग्रामीण इलाकों को मुख्य सड़कों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। उनके सैन्य अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता के कारण दूरदराज गांवों तक सड़क पहुंचाने का काम तेज हुआ। खासकर पहाड़ी राज्यों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़े। जनरल खंडूड़ी पहली बार 8 मार्च 2007 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने और 27 जून 2009 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 11 सितंबर 2011 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनका कार्यकाल सुशासन, पारदर्शिता और सख्त प्रशासन के लिए जाना गया। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और जनता को बेहतर सेवाएं देने पर विशेष ध्यान दिया। आगे पढ़िए..

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2011 में जब देशभर में Anna Hazare का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चर्चा में था, उसी दौरान खंडूड़ी सरकार ने उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल पेश किया। इस कानून की खास बात यह थी कि मुख्यमंत्री को भी जांच के दायरे में रखा गया था। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा फैसला माना गया।

‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ जैसी सख्त नीति

उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए “काम नहीं तो वेतन नहीं” जैसी सख्त सोच अपनाई। उन्होंने सरकारी सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाया ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। साथ ही तबादला नीति को पारदर्शी बनाकर सिफारिशी ट्रांसफर पर रोक लगाने की कोशिश की।

‘खंडूरी है जरूरी’ बना था लोकप्रिय नारा

2011 में जब भाजपा की छवि विवादों के कारण प्रभावित हो रही थी, तब पार्टी नेतृत्व ने दोबारा जनरल खंडूड़ी को मुख्यमंत्री बनाया। उस समय “खंडूरी है जरूरी” का नारा पूरे उत्तराखंड में गूंज उठा था। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2012 विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि वे स्वयं कोटद्वार सीट से बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए थे। इसे राज्य की राजनीति का बड़ा उलटफेर माना गया।

सेना से राजनीति तक ईमानदारी की पहचान

Bhuvan Chandra Khanduri भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद से रिटायर हुए थे। सेना से मिले अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की भावना को उन्होंने राजनीति में भी कायम रखा। उनकी साफ छवि, सादगी और कार्यशैली उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती थी। यही कारण है कि आज भी उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदार और मजबूत नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है।