देहरादून: Dehradun के प्रेमनगर क्षेत्र में जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। एक व्यक्ति ने खुद को ठगी का शिकार बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर लाखों रुपये में बेच दिया गया।
Crores of rupees defrauded by selling government land in Dehradun
जानकारी के अनुसार कोटला संतौर निवासी प्रदीप सिंह भंडारी ने शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में विकासनगर के इंद्रेश नगर क्षेत्र में स्थित एक प्लॉट करीब 42.60 लाख रुपये में खरीदा था। भुगतान का बड़ा हिस्सा बैंकिंग माध्यम से किया गया, जबकि कुछ राशि नकद दी गई। जमीन की रजिस्ट्री भी विधिवत कराई गई थी, जिससे उन्हें किसी तरह के धोखे का संदेह नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब वह दिसंबर 2025 में अपनी जमीन देखने पहुंचे तो वहां का नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। आसपास के प्लॉटों की बाउंड्री टूटी हुई मिली। स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि तहसील प्रशासन द्वारा जेसीबी से कार्रवाई की गई थी। जब पीड़ित तहसील कार्यालय पहुंचे और जमीन के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि संबंधित भूमि सरकारी है और वहां की प्लॉटिंग पूरी तरह अवैध है। इस जानकारी के बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ बड़ा धोखा हुआ है। आगे पढ़िए..
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पैसे वापस मांगने पर अभद्रता
पीड़ित ने आरोप लगाया कि जमीन बेचने वालों ने न सिर्फ सरकारी जमीन का सौदा किया, बल्कि उनके साथ धोखाधड़ी भी की। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने अभद्रता की और उन्हें धमकाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोनू थापा और अन्य आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी का है, बल्कि जमीन खरीद-फरोख्त में बढ़ते फर्जीवाड़े की ओर भी इशारा करता है।