उत्तराखंड रुड़कीvillage head passed the 10th board exam

उत्तराखंड: ग्राम प्रधान ने पास की बोर्ड परीक्षा, मिले बेटे से ज़्यादा नंबर

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में इस साल Roorkee की एक ग्राम प्रधान ने 36 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास कर मिसाल पेश की। उन्होंने इस परीक्षा में अपने बेटे से अधिक अंक हासिल किए..

Uttarakhand board result 2026: village head passed the 10th board exam
Image: village head passed the 10th board exam (Source: Social Media)

रुड़की: कहते हैं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती, Roorkee की 36 वर्षीय ग्राम प्रधान इसराना ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। उन्होंने 36 साल की उम्र में हाईस्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास कर अपने परिवार सहित पूरे क्षेत्र को गर्व महसूस कराया है।

village head passed the 10th board exam

गौरतलब है कि बीते 25 अप्रैल को उत्तराखंड बोर्ड का परीक्षा परिणाम जारी किया गया है। इस साल भी परीक्षा परिणाम में बेटियों का दबदबा देखने को मिला। हाईस्कूल में एमपी इंटर कॉलेज रामनगर के अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं इंटरमीडिएट में सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज बागेश्वर की गीतिका पंत और भंजुराम अमर इंटर कॉलेज भूरारानी, ऊधमसिंह नगर की सुशीला मेहंदीरत्ता ने 98 प्रतिशत अंक के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया।

36 साल की ग्राम प्रधान बनीं प्रेरणा

Roorkee के टोडा कल्याणपुर एहतमाल गांव की ग्राम प्रधान इसराना ने यह दिखा दिया कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखकर यह उपलब्धि हासिल की। इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि इसराना के बेटे मो. अदनान ने भी इस साल इंटरमीडिएट परीक्षा पास की, लेकिन उनकी मां ने उनसे ज्यादा अंक हासिल किए। यह पल पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय बन गया और क्षेत्र में इसकी खूब चर्चा हो रही है। आगे पढ़िए..

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असफलता के बाद भी नहीं मानी हार

इसराना ने पिछले साल हाईस्कूल परीक्षा देने का निर्णय लिया था, लेकिन पहली बार में वह एक विषय में असफल हो गईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा मेहनत कर परीक्षा दी। इस बार उन्होंने शानदार सफलता हासिल कर खुद को साबित कर दिया। ग्राम प्रधान होने के नाते इसराना पर गांव की जिम्मेदारी थी। इसके साथ ही उन्होंने घर-परिवार और बच्चों की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपने लिए समय निकाला और नियमित पढ़ाई करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। इसराना की सफलता आज कई महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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