देहरादून: उत्तराखंड में मृत्यु दर के आंकड़े एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। यहां हर साल होने वाली कुल मौतों में से करीब 60 प्रतिशत पुरुषों की होती हैं। यानी हर 10 में से 6 मौतें पुरुषों की हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Male Mortality Higher in Uttarakhand: Alarming Data Revealed
यदि कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में एक वर्ष में लगभग 58,465 मौतें दर्ज होती हैं। इनमें से 36,232 पुरुष और 22,233 महिलाएं शामिल हैं। यानी हर साल करीब 14,000 से अधिक पुरुषों की मृत्यु हो रही है। यह अंतर साफ बताता है कि पुरुषों की सेहत को लेकर बड़ी चुनौती मौजूद है। यह समस्या किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उम्र में पुरुषों की मौतें महिलाओं की तुलना में ज्यादा हैं। यह समस्या किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है:-
हर उम्र में पुरुषों की ज्यादा मौतें
15–24 वर्ष :-पुरुष मौतें दोगुनी
25–34 वर्ष :- करीब 2.4 गुना ज्यादा
35–44 वर्ष :- लगभग 3 गुना
45–54 वर्ष :- 2.1 गुना ज्यादा
55–64 वर्ष :- करीब दोगुना
70+ आयु :- सबसे ज्यादा मौतें
यानी जीवन के हर चरण में पुरुष ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। आगे पढ़िए..
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गांव से शहर तक एक जैसा पैटर्न
दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। गांवों से लेकर शहरों तक हर जगह यही पैटर्न देखने को मिल रहा है। इससे यह साफ होता है कि समस्या व्यापक है और समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस असंतुलन के पीछे कई कारण हैं। इनमें जोखिम भरी जीवनशैली, काम का अधिक दबाव, मानसिक तनाव, समय पर इलाज न कराना और छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज करना प्रमुख हैं। ये सभी कारक मिलकर पुरुषों की सेहत पर गंभीर असर डालते हैं।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
अक्सर देखा जाता है कि पुरुष अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं देते। वे नियमित स्वास्थ्य जांच से बचते हैं और बीमारी होने पर भी देर से इलाज कराते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों और समय से पहले मृत्यु का कारण बन सकती है।
क्या है समाधान?
इस स्थिति से निपटने के लिए जरूरी है कि पुरुष अपनी सेहत के प्रति जागरूक हों। नियमित हेल्थ चेकअप कराएं, संतुलित आहार लें, तनाव को नियंत्रित करें और समय पर इलाज कराएं। इसके साथ ही समाज को भी इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
यह आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि एक चेतावनी हैं कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है। पुरुषों की स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।