उत्तराखंड नैनीतालHigh Court Questions Delay in FIR in Graphic Era Student Death Case

उत्तराखंड: ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में छात्रा की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- क्यों दर्ज नहीं की FIR?

Nainital High Court ने Bhimtal स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में राज्य सरकार से FIR दर्ज न करने पर जवाब मांगा है।

Graphic Era University case: High Court Questions Delay in FIR in Graphic Era Student Death Case
Image: High Court Questions Delay in FIR in Graphic Era Student Death Case (Source: Social Media)

नैनीताल: Nainital High Court ने ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की छात्रा वैश्वी तोमर की संदिग्ध मौत के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि परिजनों की शिकायत के बावजूद प्राथमिकी (FIR) क्यों दर्ज नहीं की गई। इस मामले में न्यायालय ने 28 अप्रैल तक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

High Court Questions Delay in FIR in Graphic Era Student Death Case

न्यायमूर्ति Rakesh Thapliyal की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया गया कि जब परिजनों ने शिकायत दी थी, तो स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज क्यों नहीं किया। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख भी 28 अप्रैल तय की है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला Bhimtal स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी से जुड़ा है, जहां 18 वर्षीय छात्रा वैश्वी तोमर बीसीए की पढ़ाई कर रही थी और छात्रावास में रहती थी। 30 जुलाई 2025 को कॉलेज प्रशासन की ओर से परिवार को सूचना दी गई कि छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया कि उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रैगिंग के आरोप और मानसिक दबाव

छात्रा के पिता राम कृष्ण तोमर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनकी बेटी को कॉलेज के कुछ सीनियर छात्र परेशान करते थे और रैगिंग का सामना करना पड़ रहा था। बेटी ने फोन पर कई बार इस बारे में बताया था और वह मानसिक रूप से परेशान थी। परिजनों का मानना है कि इसी कारण उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। आगे पढ़िए..

ये भी पढ़ें:

परिजनों ने जब भवाली थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उनका आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की गई। मजबूर होकर परिवार को लखनऊ में जाकर जीरो FIR दर्ज करानी पड़ी।

छात्रा की मौत की निष्पक्ष और गहन जांच

लखनऊ पुलिस ने मामले को संबंधित क्षेत्र यानी भवाली थाने को भेज दिया, लेकिन इसके बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इसी देरी और लापरवाही को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया है और जवाबदेही तय करने की बात कही है।
याचिका में परिवार ने कोर्ट से मांग की है कि उनकी बेटी की मौत की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले में जांच की दिशा और तेज होने की उम्मीद है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी, जहां राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस केस ने न केवल छात्र सुरक्षा बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली और संस्थागत जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।