उत्तराखंड देहरादूनSuccessful Delivery Despite 20 Uterine Fibroids

देहरादून: बच्चेदानी से 20 गांठें निकालकर सफल प्रसव, देश में पहला.. दुनिया में दूसरा मामला

Dehradun Medical News: देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल में 34 वर्षीय महिला का दुर्लभ प्रसव सफल रहा, जिसकी बच्चेदानी में करीब 20 गांठें थीं। नई तकनीक से सर्जरी कर रक्तस्राव कम किया गया। मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

Dehradun Medical News: Successful Delivery Despite 20 Uterine Fibroids
Image: Successful Delivery Despite 20 Uterine Fibroids (Source: Social Media)

देहरादून: Graphic Era Hospital में डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। 34 वर्षीय महिला की बच्चेदानी में करीब 20 गांठें (फाइब्रॉइड) होने के बावजूद सुरक्षित प्रसव कराया गया। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि देश में इस तरह का यह पहला सफल मामला है।

Rare Medical Breakthrough: Successful Delivery Despite 20 Uterine Fibroids

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले 34 वर्षीय गर्भवती महिला को Graphic Era अस्पताल में भर्ती किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि उसकी बच्चेदानी में कई गांठें हैं, जो प्रसव के दौरान गंभीर खतरा पैदा कर सकती थीं। डॉक्टरों के अनुसार, इस स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।

नई तकनीक से कम किया गया रक्तस्राव

कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट और लेप्रोस्कोपिक सर्जन Dr. Divya Mishra के नेतृत्व में ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन थिएटर में एक विशेष तकनीक अपनाई गई, जिससे सर्जरी की गति बढ़ाई गई और रक्तस्राव को न्यूनतम रखा गया।आगे पढ़िए..

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देश में पहला, दुनिया में दूसरा मामला

डॉ. दिव्या मिश्रा के अनुसार, इस तरह का केस देश में पहले कभी रिपोर्ट नहीं हुआ है। विश्व स्तर पर भी यह अपनी तरह का दूसरा मामला माना जा रहा है। इससे पहले एक ऐसा मामला Nigeria में दर्ज किया गया था। सफल ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। कुछ दिन निगरानी में रखने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

अस्पताल प्रबंधन ने दी बधाई

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन Dr. Kamal Ghanshala ने इस उपलब्धि पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर जटिल मामलों का सफल इलाज किया जा रहा है।
यह उपलब्धि न केवल देहरादून बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी मेडिकल सफलता मानी जा रही है। इस तरह के जटिल मामलों में नई तकनीकों का उपयोग भविष्य में कई जिंदगियां बचाने में मददगार साबित हो सकता है।