उत्तराखंड पिथौरागढ़MLast rites of martyr Lance Naik Vikas Kumar

Uttarakhand: तिरंगे में लिपटे पति को देखकर पत्नी बोली- इन्हें अस्पताल ले चलो, गणकोट गांव में हर आंख हुईं नम

Pithoragarh News: तिरंगे में लिपटकर लौटे Vikas Kumar को देख पत्नी का दिल टूट गया, उनकी पुकार “इन्हें अस्पताल ले चलो” हर किसी की आंखें नम कर गई। उनका अधूरा वादा और मासूम बेटे की अनजानी दुनिया इस बलिदान को और भी दर्दनाक बना देती है।

Vikas Kumar martyr: MLast rites of martyr Lance Naik Vikas Kumar
Image: MLast rites of martyr Lance Naik Vikas Kumar (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के Pithoragarh जिले के गणकोट गांव में उस समय गहरा शोक छा गया, जब भारतीय सेना के जांबाज Vikas Kumar का पार्थिव शरीर पांच दिनों बाद उनके पैतृक घर पहुंचा। Sikkim में हुए भीषण हिमस्खलन में शहीद हुए इस जवान की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुई। गांव के हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और हर दिल में गर्व के साथ-साथ अपार दुख भी था।

Pithoragarh News: Last rites of martyr Lance Naik Vikas Kumar

जानकारी के अनुसार 29 मार्च को जांबाज Vikas Kumar के शहादत की खबर मिलने के बाद से ही परिवार और गांव के लोग शोक में डूबे हुए थे। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने में पांच दिन लग गए, और इस दौरान हर पल परिवार के लिए भारी था। शहीद की पत्नी प्रीती और माता-पिता का लगातार रो-रोकर बुरा हाल था। शुक्रवार को जब सूचना मिली कि पार्थिव शरीर गांव पहुंचने वाला है, प्रीती रास्ते में ही खड़ी होकर उनका इंतजार करने लगीं। गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था कि वह इस दर्द को सहन नहीं कर पा रही हैं।

ताबूत से लिपटकर बिलख उठीं पत्नी

जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके आंगन में लाया गया, तो यह दृश्य हर किसी के लिए असहनीय था। Preeti बेसुध होकर ताबूत से लिपट गईं और जोर-जोर से रोने लगीं। जब अंतिम दर्शन के लिए ताबूत खोला गया, तो उनका दर्द और भी बढ़ गया। वो ताबूत से लिपट कर जोर-जोर से रोने लगी, बार-बार यही कहती रहीं— “इन्हें अस्पताल लेकर चलो…” उनकी यह पुकार वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर गई।आगे पढ़िए..

ये भी पढ़ें:

अधूरा रह गया बेटे से किया वादा

चार महीने पहले जब Vikas Kumar छुट्टी पर घर आए थे, तब उन्होंने अपने छोटे बेटे के पहले जन्मदिन पर जून में फिर से घर लौटने का वादा किया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज वही पिता अपने बेटे के पास तिरंगे में लिपटकर लौटे हैं। उनका लगभग 10 महीने का मासूम बेटा अभी इस सच्चाई से अनजान है कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। इस घटना के बाद से शहीद विकास कुमार के परिजनों हाल बुरा है, ग्रामीण और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने घर पर पहुंच रहे हैं।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

बीते शुक्रवार को घर पर अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को रामेश्वर घाट ले जाया गया। जिसके बाद भारतीय सेना ने अपने इस वीर जवान को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। सलामी के बीच हर किसी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि देश के प्रति उनके समर्पण और बलिदान को नमन था। Vikas Kumar का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जीवन और उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने यह साबित कर दिया कि देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।