देहरादून: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस अंतरराष्ट्रीय स्थिति का सीधा प्रभाव एलपीजी गैस की सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे उत्तराखंड की आगामी चार धाम यात्रा 2026 को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यात्रा शुरू होने में अब महज कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन गैस और ईंधन की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
20 lakh LPG cylinders needed for Char Dham Yatra 2026
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। सरकार ने घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई को बनाए रखने के लिए व्यवस्था जरूर की है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पहले जैसी नहीं रह गई है। इसका असर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और धर्मशालाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। यदि यह स्थिति बनी रही तो यात्रा के दौरान खाने-पीने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत जल्द होने जा रही है। 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम व हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी जोरों पर है, लेकिन संसाधनों की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
20 लाख एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत
इस वर्ष चार धाम यात्रा के दौरान एलपीजी सिलेंडरों की मांग एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। पिछले साल लगभग 16.4 लाख सिलेंडरों का उपयोग हुआ था, जबकि इस बार करीब 20 लाख सिलेंडरों की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। यह बढ़ती मांग सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है, जिसे समय रहते पूरा करना आवश्यक है। चार धाम यात्रा 2026 में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे गैस, ईंधन और अन्य संसाधनों की मांग और बढ़ेगी। होटल, धर्मशाला और भोजनालयों में भीड़ बढ़ने के साथ ही गैस की खपत कई गुना बढ़ सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कमी की आशंका
एलपीजी संकट के साथ-साथ ट्रांसपोर्टरों को पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी की भी चिंता सता रही है। फिलहाल देश में ईंधन की स्थिति सामान्य है, लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा खिंचता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर चार धाम यात्रा के दौरान वाहनों के संचालन और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर पड़ सकता है। चार धाम यात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। चार धाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में वाहन श्रद्धालुओं को धामों तक पहुंचाते हैं। ऋषिकेश से करीब 1400 बसें, हरिद्वार से 800 बसें, 1000 जीप/मैक्सी, 800 टेंपो ट्रैवलर और 1000 से 1500 टैक्सियां इस यात्रा में शामिल होती हैं। इन वाहनों के जरिए ही लाखों श्रद्धालु यात्रा पूरी करते हैं, ऐसे में ईंधन की कमी पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह समय पर एलपीजी और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो चार धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और व्यापारियों दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन और संबंधित विभागों को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।